Integrated Farming: इस तकनीक से करें बकरी-मुर्गी का पालन, कम लागत में पाएं ज्यादा मुनाफा
कम जमीन और सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम कम लागत में ज्यादा कमाई का नया तरीका बन रहा है. बकरी और मुर्गी पालन को एक साथ जोड़कर खर्च कम किया जा सकता है और आय के कई स्रोत बनाए जा सकते हैं.
Integrated Farming: गांवों में खेती और पशुपालन हमेशा से आजीविका का मजबूत सहारा रहे हैं. अब बदलते समय के साथ किसान कम जमीन और कम लागत में ज्यादा कमाई के नए तरीके तलाश रहे हैं. ऐसे ही एक मॉडल ने छोटे किसानों और पशुपालकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. उस मॉडल का नाम है इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS). किसान इसके जरिए बकरी और मुर्गी पालन को एक साथ जोड़कर कम खर्च में बेहतर मुनाफा कमा सकते है. ये तरीका खासकर उन किसानों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है जिनके पास सीमित संसाधन हैं.
एक ही शेड में बकरी और मुर्गियां
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मॉडल में एक ऐसा शेड तैयार किया जाता है जिसमें बकरी और मुर्गियां पास-पास रहते हैं, लेकिन उनके बीच लोहे की मजबूत जाली लगाई जाती है. इससे दोनों अलग रहते हुए भी एक ही जगह का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस व्यवस्था से जगह की बचत होती है और बीमारी फैलने का खतरा भी कम हो जाता है. एक बकरी के साथ पांच मुर्गियों को आसानी से पाला जा सकता है, जिससे एक ही स्थान पर दो तरह की आय का स्रोत बन जाता है.
कम खर्च में ज्यादा फायदा
इस सिस्टम में बकरियां दिन में चरने के लिए बाहर चली जाती हैं. उसी समय मुर्गियों को उस हिस्से में छोड़ दिया जाता है जहां बकरियों के खाने का बचा हुआ हरा चारा गिरा होता है. मुर्गियां इस चारे को खा लेती हैं. इससे मुर्गियों के दाने की खपत में रोजाना करीब 30-40 ग्राम तक कमी आ जाती है. यही छोटी-छोटी बचत मिलकर पशुपालकों के खर्च को काफी कम कर देती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मॉडल से मुर्गी पालन की लागत लगभग 40-50 प्रतिशत तक घट सकती है, जबकि बकरी पालन से होने वाली आय पहले की तरह बनी रहती है.
अजोला से तैयार होता सस्ता चारा
इस प्रणाली का एक अहम हिस्सा अजोला उत्पादन भी है. बकरी की मेंगनी और मिट्टी की मदद से पानी की एक उथली टंकी में अजोला आसानी से उगाया जा सकता है. अजोला एक हाई-प्रोटीन फीड माना जाता है, जो मुर्गियों के लिए पौष्टिक भोजन का काम करता है. इसका उत्पादन रोजाना करीब 200 से 300 ग्राम तक हो सकता है. इससे बाजार से दाना खरीदने की जरूरत कम हो जाती है और पशुपालकों की लागत घटती है.
छोटे किसानों के लिए टिकाऊ मॉडल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (Integrated Farming System) उन किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन रहा है जिनके पास कम जमीन और सीमित संसाधन हैं. इस मॉडल में एक ही शेड से कई तरह की आय संभव हो जाती है. बकरी पालन से नियमित आय मिलती है, मुर्गी पालन से अतिरिक्त कमाई होती है और अजोला उत्पादन से चारे का खर्च कम हो जाता है. इस तरह कम निवेश में ज्यादा मुनाफा कमाने का रास्ता बनता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है, बल्कि पशुपालन को ज्यादा टिकाऊ और लाभदायक भी बना सकती है. यही वजह है कि अब कई किसान इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. कुल मिलाकर, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम पशुपालन और खेती को जोड़कर कम लागत में बेहतर कमाई का एक आसान और समझदार तरीका बनकर सामने आ रहा है.