Goat Farming: गांव में रहने वाला किसान आज सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहता. बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम ने उसे नए रास्ते तलाशने पर मजबूर कर दिया है. ऐसे में बकरी और मुर्गी को एक साथ पालने का तरीका किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रहा है. यह मॉडल न सिर्फ खर्च घटाता है, बल्कि हर महीने पक्की कमाई का रास्ता भी खोलता है. थोड़ी सी समझदारी और सही योजना से यह काम घर बैठे अच्छी आमदनी दिला सकता है.
एक मॉडल, दो फायदे: खर्च में सीधी कटौती
बकरी और मुर्गी को साथ पालने का सबसे बड़ा फायदा खर्च में कमी है. बकरियों का बचा हुआ चारा मुर्गियां आसानी से खा लेती हैं. इससे मुर्गियों के लिए अलग से दाना डालने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है. रोज थोड़ी-थोड़ी बचत महीने के अंत में बड़ी रकम बन जाती है. साथ ही सफाई भी अपने-आप हो जाती है, क्योंकि मुर्गियां जमीन पर गिरे दानों को चुन लेती हैं.
एक शेड में दो काम, मेहनत भी कम
अलग-अलग शेड बनाने की बजाय एक साझा शेड बनाना ज्यादा फायदेमंद रहता है. बीच में जाली लगाकर बकरी और मुर्गी को अलग रखा जा सकता है. जब बकरियां बाहर चरने जाती हैं, तब मुर्गियों को अंदर छोड़ देने से शेड साफ रहता है. इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है. कम जगह में ज्यादा काम निकल आना इस मॉडल की बड़ी खासियत है.
मेंगनी नहीं कचरा, कमाई का साधन
अक्सर बकरियों की मेंगनी को बेकार समझ लिया जाता है, जबकि यही असली खजाना है. इससे अच्छी गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार की जा सकती है. इस खाद से खेत में हरा चारा उगाना आसान हो जाता है, जिससे बाहर से चारा खरीदने का खर्च कम हो जाता है. यही खाद आगे चलकर अजोला उगाने में भी काम आती है, जो पशुओं के लिए पौष्टिक आहार है.
अंडे, दूध और मांस से हर महीने कमाई
मुर्गियां साल भर में अच्छी संख्या में अंडे देती हैं, जिनकी रोजाना बिक्री से नियमित आमदनी होती है. कुछ समय बाद इन्हें मांस के रूप में भी बेचा जा सकता है. वहीं बकरियों से दूध, बच्चे और खाद तीनों तरह से फायदा मिलता है. जब दोनों को सही तरीके से संभाला जाए, तो कम खर्च और कम मेहनत में हर महीने 20 रुपये से 25 हजार रुपये तक की कमाई संभव है.