Livestock Feed: इस घास से पशुओं को मिलेगा पूरा पोषण, जान लें दूध उत्पादन बढ़ाने का सबसे आसान तरीका
पशुओं को पोषणयुक्त चारा देने से उनकी सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन बढ़ता है. ये घास एक सस्ता और पौष्टिक चारा है जिसे घर पर आसानी से उगाया जा सकता है. इसे आहार में शामिल करने से पशुपालकों को कम खर्च में अच्छा फायदा मिल सकता है और पशु स्वस्थ रहते हैं.
Azolla Feed: पशुपालन में सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि पशु स्वस्थ रहें और दूध उत्पादन अच्छा बना रहे. लेकिन कई बार महंगा चारा और पोषण की कमी इस काम को मुश्किल बना देती है. ऐसे में एक छोटा-सा हरा चारा पशुपालकों के लिए बड़ा सहारा बन सकता है. यह चारा कम लागत में तैयार होता है और पशुओं को भरपूर पोषण देता है. यही कारण है कि अब कई पशुपालक अजोला घास को अपने पशुओं के आहार में शामिल करने लगे हैं.
अजोला बना पशुपालकों का नया सहारा
पशुपालन से अच्छी कमाई तभी संभव है जब पशु मजबूत और स्वस्थ रहें. इसके लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी होता है. अजोला एक जलीय घास है, जो पानी में उगती है और बहुत तेजी से फैलती है. देखने में यह छोटी-छोटी हरी पत्तियों जैसी होती है, लेकिन पोषण के मामले में काफी मजबूत होती है. इसमें प्रोटीन, खनिज और विटामिन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे पशुओं के लिए एक अच्छा पूरक चारा माना जाता है. खास बात यह है कि इसे उगाने के लिए ज्यादा जगह या खर्च की जरूरत नहीं होती. घर के आंगन या खेत में बने छोटे पानी के टैंक में भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है.
दूध उत्पादन और सेहत में दिखेगा फर्क
अजोला को पशुओं के आहार में शामिल करने से कई फायदे मिलते हैं. इसमें करीब 25 से 30 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, जो पशुओं के शरीर के विकास और ताकत के लिए जरूरी होता है. दुधारू पशुओं को यह चारा देने से दूध उत्पादन में सुधार देखा जाता है. इसके साथ ही पशुओं का पाचन तंत्र मजबूत होता है और उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यह कम लागत वाला चारा है. बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम हो जाती है, जिससे पशुपालकों का खर्च घटता है और मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है.
घर पर आसानी से उगाया जा सकता है अजोला
अजोला उगाना बहुत मुश्किल काम नहीं है. इसके लिए जमीन में एक छोटा गड्ढा खोदकर उसमें पॉलीथिन बिछाई जाती है. फिर उसमें 5 से 6 इंच तक पानी भरा जाता है. इसके बाद पानी में थोड़ी मिट्टी और गोबर मिलाया जाता है ताकि अजोला तेजी से बढ़ सके. फिर अजोला कल्चर डाल दिया जाता है. कुछ ही दिनों में यह पूरे टैंक में फैलने लगता है और नियमित रूप से चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस प्रक्रिया में ज्यादा मेहनत या खर्च नहीं लगता, इसलिए छोटे पशुपालक भी इसे आसानी से अपना सकते हैं.
सही तरीके से खिलाना भी है जरूरी
अजोला को पशुओं को देने से पहले साफ पानी से धोना चाहिए ताकि गंदगी हट जाए. इसके बाद इसे हरे चारे या भूसे में मिलाकर खिलाया जा सकता है. शुरुआत में थोड़ी मात्रा दें और धीरे-धीरे बढ़ाएं, ताकि पशु इसे आसानी से खाने लगें. गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गी और सुअर जैसे कई पशुओं को अजोला खिलाया जा सकता है. इससे पशुओं को जरूरी पोषण मिलता है और उनकी सेहत बेहतर रहती है. पशुपालकों के लिए यह चारा कम लागत में ज्यादा फायदा देने वाला साबित हो सकता है. अगर सही तरीके से अजोला का उपयोग किया जाए, तो पशुओं की सेहत सुधरती है, दूध उत्पादन बढ़ता है और पशुपालन का काम ज्यादा लाभदायक बन सकता है.