हर दिन 11 लाख किलो दूध उत्पादन कर रहे किसान, कमाई 7 करोड़ बढ़कर 2100 करोड़ पहुंची

मध्य प्रदेश में डेयरी सेक्टर तेजी से मजबूत हो रहा है. एनडीडीबी के टेकओवर के बाद दूध उत्पादन, किसानों के भुगतान और कारोबार में बड़ा सुधार देखने को मिला है. प्रदेश में रोजाना दूध संग्रहण बढ़ा है और आधुनिक तकनीक के जरिए गुणवत्ता जांच तथा पारदर्शिता पर भी जोर दिया जा रहा है. इससे लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 17 May, 2026 | 11:27 AM

Dairy Farming: मध्य प्रदेश में डेयरी सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. मप्र स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) द्वारा टेकओवर किए जाने के एक साल के भीतर दूध उत्पादन, किसानों के भुगतान और डेयरी कारोबार में बड़ा सुधार देखने को मिला है. प्रदेश में रोजाना दूध संग्रहण बढ़कर 11.50 लाख किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि फेडरेशन का सालाना टर्नओवर भी करीब 250 करोड़ रुपये तक बढ़ा है. डेयरी सेक्टर में आई इस तेजी ने लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों को नई उम्मीद दी है.

एक साल में बढ़ा दूध संग्रहण और कारोबार

एनडीडीबी ने पिछले साल मई महीने में एमपीसीडीएफ का जिम्मा संभाला था. उस समय प्रदेश में रोजाना दूध संग्रहण  करीब 9.65 लाख किलोग्राम था, लेकिन अब यह बढ़कर 11.50 लाख किलोग्राम तक पहुंच गया है. इसके साथ ही डेयरी कारोबार में भी बड़ा उछाल आया है. पहले जहां किसानों को लगभग 1,398 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, वहीं अब दूध संग्रहण से जुड़ा कारोबार 2,100 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया है. डेयरी फेडरेशन का कहना है कि पारदर्शिता बढ़ाने, दूध संग्रहण व्यवस्था मजबूत करने और भुगतान प्रणाली सुधारने से किसानों का भरोसा बढ़ा है. प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर जैसे क्षेत्रों में दूध संग्रहण में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे डेयरी सेक्टर में नई गतिविधियां भी तेज हुई हैं.

मशीन और मोबाइल ऐप से होगी दूध की जांच

डेयरी फेडरेशन अब दूध की गुणवत्ता  जांच को पूरी तरह आधुनिक बनाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए नई मशीनें लगाई जा रही हैं, जिनमें दूध का वजन और गुणवत्ता मापने की सुविधा एक साथ होगी. ये मशीन दूध में फैट की मात्रा और वजन की जानकारी सीधे मोबाइल ऐप पर दर्ज करेगी. इससे किसानों और दूध संग्रहण केंद्रों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी. किसान तुरंत अपने मोबाइल पर यह देख सकेंगे कि उनके दूध का कितना वजन हुआ और कितना भुगतान मिलेगा. फेडरेशन का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से गड़बड़ी कम होगी और किसानों का विश्वास और मजबूत होगा. इससे डेयरी कारोबार को और गति मिलने की उम्मीद है.

प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

मध्य प्रदेश में अब प्रति गोवंश दूध उत्पादन बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है. वर्तमान में प्रदेश में प्रति पशु औसतन 4.5 किलोग्राम दूध उत्पादन हो रहा है. इसे बढ़ाकर 6.5 किलोग्राम प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए नस्ल सुधार, हाईब्रिड पशु उपलब्ध कराने और बेहतर पशुपालन तकनीक  पर काम किया जाएगा. किसानों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पशुओं की नस्ल और पोषण में सुधार हुआ, तो दूध उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है. इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और डेयरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी.

दूध प्रोसेसिंग क्षमता को 50 लाख किलोग्राम तक बढ़ाने की योजना

प्रदेश में अभी दूध प्रोसेसिंग की क्षमता करीब 18 लाख किलोग्राम प्रतिदिन है, जिसमें से लगभग 10 लाख किलोग्राम दूध रोजाना प्रोसेस किया जा रहा है. अब सरकार और फेडरेशन इसे बढ़ाकर 50 लाख किलोग्राम प्रतिदिन तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर में मौजूद प्रोसेसिंग प्लांटों का विस्तार किया जाएगा. इसके अलावा नई तकनीक और बेहतर मशीनों के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाएगी. फेडरेशन के अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ कारोबार बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि लाखों किसानों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ना और उनका भरोसा जीतना भी बड़ी प्राथमिकता है. दूध की गुणवत्ता सुधारने  और ग्राहकों का विश्वास मजबूत करने पर भी लगातार काम किया जा रहा है.

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