Murrah Buffalo: गांवों में पशुपालन हमेशा से कमाई का भरोसेमंद जरिया रहा है, लेकिन जब इसमें सरकार की मदद जुड़ जाए तो छोटे परिवारों की जिंदगी सच में बदल सकती है. यही तस्वीर अब मध्य प्रदेश के कई आदिवासी इलाकों में देखने को मिल रही है, जहां सीएम दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंसें दी जा रही हैं. इस पहल का मकसद सिर्फ पशु देना नहीं, बल्कि परिवारों को रोजगार, नियमित आय और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाना है. अच्छी नस्ल की भैंस मिलने से दूध उत्पादन बढ़ेगा, जिससे घर की आमदनी के साथ पोषण भी मजबूत होगा.
15 हितग्राहियों को मिली मुर्रा दुधारू भैंस
मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार विकासखंड स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में सहरिया जनजाति के 15 लाभ पाने वाले पात्र व्यक्ति को एक-एक मुर्रा भैंस उपलब्ध कराई गई. मुर्रा नस्ल को ज्यादा दूध देने वाली और मजबूत नस्ल माना जाता है. यही वजह है कि इसे डेयरी के लिए सबसे बेहतर विकल्पों में गिना जाता है. इस योजना से जुड़े परिवार अब रोज दूध बेचकर नियमित कमाई कर सकेंगे. गांवों में डेयरी से जुड़ाव बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे. खास बात यह है कि एक भैंस से शुरू हुआ यह काम आगे चलकर छोटा डेयरी यूनिट भी बन सकता है.
90 फीसदी सरकारी अनुदान से आसान हुआ पशुपालन
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका 90 प्रतिशत सरकारी अनुदान है. हितग्राही को सिर्फ 10 प्रतिशत राशि ही अपनी तरफ से देनी होती है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी आसानी से अच्छी नस्ल की भैंस खरीद पाते हैं. मुर्रा भैंस की बाजार में अच्छी कीमत होती है और इसका दूध भी ज्यादा फैट वाला माना जाता है, जिससे डेयरी और मिठाई कारोबार में बेहतर दाम मिलता है. ऐसे में यह योजना सिर्फ एक सहायता नहीं, बल्कि लंबे समय की कमाई का मजबूत मॉडल बनकर सामने आ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हितग्राही सही तरीके से देखभाल करें, तो एक भैंस से शुरू हुई आय कुछ ही समय में कई गुना तक बढ़ सकती है.
पशुओं की देखभाल और टीकाकरण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों को यह भी समझाया गया कि सिर्फ भैंस लेना ही काफी नहीं, उसकी सही देखभाल भी जरूरी है. पशुपालन विभाग ने लाभार्थियों को समय-समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार, साफ पानी और साफ शेड रखने की सलाह दी. अगर पशु बीमार पड़े तो नजदीकी पशु चिकित्सालय से तुरंत इलाज कराने को कहा गया. सही देखभाल से दूध उत्पादन लंबे समय तक अच्छा बना रहता है और पशु जल्दी कमजोर नहीं पड़ता. इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि योजना के तहत मिली भैंस को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचा न जाए, ताकि योजना का असली लाभ सही परिवार तक बना रहे.
आदिवासी परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता
मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग का मानना है कि यह योजना आदिवासी और कमजोर वर्ग के परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने का बड़ा जरिया बन रही है. दूध से रोजाना नकद आय मिलती है, जिससे परिवार के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे जरूरी काम आसानी से पूरे हो सकते हैं. गांवों में डेयरी से जुड़ी ऐसी योजनाएं महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं, क्योंकि पशुपालन में उनका योगदान सबसे ज्यादा होता है सीएम दुधारू पशु प्रदाय योजना ने यह साफ कर दिया है कि सही सरकारी मदद और अच्छी नस्ल के पशु मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवारों की आर्थिक तस्वीर तेजी से बदल सकती है.
दुधारू पशु योजना में ऐसे करें आसान आवेदन
मध्य प्रदेश में दुधारू पशु योजना के तहत पशुपालकों को 2 उच्च नस्ल की गाय या भैंस की इकाई दी जाती है, जिससे दूध उत्पादन और आय बढ़ाने में मदद मिलती है. आवेदन के लिए समग्र आईडी, आधार कार्ड, निवास, जाति प्रमाण-पत्र, बैंक पासबुक और पशु शेड की फोटो जरूरी है. इच्छुक पशुपालक पशुपालन विभाग की वेबसाइट mpdah.gov.in पर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं, जबकि ऑफलाइन आवेदन नजदीकी पशु चिकित्सा कार्यालय या विकासखंड कार्यालय में जमा होगा.