भीषण गर्मी में पशु हो रहे बेहाल! दूध उत्पादन गिरने से लेकर बीमारी तक का खतरा, मई में पशुपालक जरूर करें ये काम

Dairy Farming Tips: मई का महीना अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, जिससे लू लगना, पानी की कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में पशुओं को छायादार व हवादार जगह पर रखना, पर्याप्त ठंडा पानी और खनिज मिश्रण देना जरूरी है. संतुलित आहार, हरा चारा और समय-समय पर कृमिनाशक दवाओं का उपयोग पशुओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 11 May, 2026 | 10:40 PM

May Dairy Care Tips: मई का महीना ज्यादा गर्मी के लिए जाना जाता है, जिसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन पर पड़ता है. इस दौरान पशुओं में लू लगना, भूख कम लगना, शरीर में पानी और लवण की कमी तथा दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग बिहार के अनुसार, ऐसे में पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है ताकि पशु स्वस्थ और उत्पादक बने रहें.

पशुओं को गर्मी से बचाने के उपाय

विभाग के अनुसार, गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए पशुओं को हमेशा छायादार और हवादार स्थान पर रखना चाहिए. सीधे धूप और गर्म हवा से बचाव जरूरी है. पशुशाला में साफ-सफाई और ठंडक बनाए रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है. दिन के समय पशुओं को ठंडे और आरामदायक स्थान पर रखना उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है.

पानी और खनिज की पर्याप्त व्यवस्था

गर्मी में पशुओं के शरीर में पानी और नमक की कमी जल्दी हो जाती है. इसलिए स्वच्छ और ठंडे पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए. पशुओं को समय-समय पर पानी पिलाना जरूरी है. इसके साथ ही खनिज मिश्रण को पानी या चारे के साथ मिलाकर देना चाहिए, जिससे शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी न हो. हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस समय ज्वार और मक्का की बुवाई करना लाभकारी होता है. इससे आने वाले महीनों में पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा आसानी से उपलब्ध हो सकेगा. यह पशुपालन की लागत को भी कम करने में मदद करता है.

संतुलित आहार और चारे का प्रबंधन

इस मौसम में पशुओं के आहार में विशेष बदलाव करना चाहिए. गेहूं का चोकर और जौ की मात्रा बढ़ाकर देना फायदेमंद होता है. साथ ही सूखा चारा और हरे चारे का संतुलन बनाए रखना चाहिए. संतुलित आहार से न केवल पशुओं की ऊर्जा बनी रहती है बल्कि दूध उत्पादन क्षमता भी बेहतर होती है.

गर्मी के मौसम में पशुओं में चमोकन और पेट के कीड़ों जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. इसलिए समय-समय पर कृमिनाशक दवाओं का उपयोग और सही स्वास्थ्य जांच जरूरी है. इसके अलावा खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण और जागरूकता अपनानी चाहिए.

भेड़ पालन और अतिरिक्त सावधानियां

भेड़ पालकों के लिए यह समय महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस महीने भेड़ों के ऊन कतरने का कार्य किया जाता है. इससे न केवल स्वच्छता बनी रहती है बल्कि गर्मी से भी राहत मिलती है. मई का महीना पशुपालन के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही देखभाल, संतुलित आहार और समय पर स्वास्थ्य प्रबंधन से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है. इससे न केवल पशुओं की उत्पादकता बढ़ती है बल्कि पशुपालकों की आय में भी सुधार होता है.

 

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Published: 11 May, 2026 | 10:40 PM
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