बरसात में पशुओं की छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानिए बचाव के आसान और जरूरी उपाय

बरसात का मौसम गाय-भैंस जैसे दुधारू पशुओं के लिए कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है. समय पर लक्षण पहचानना, साफ-सफाई बनाए रखना और नियमित टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी पशुओं को सुरक्षित रखने के साथ दूध उत्पादन और पशुपालकों की आय को भी बचा सकती है.

नोएडा | Updated On: 24 Jul, 2026 | 08:38 PM

Animal Care Tips: बरसात का मौसम जहां खेती और पशुपालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं ये गाय-भैंस जैसे दुधारू पशुओं के लिए कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है. जुलाई से अक्टूबर के बीच नमी, गंदगी और बदलते मौसम के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है. यदि समय पर सावधानी न बरती जाए तो पशुओं की सेहत के साथ दूध उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बरसात में क्यों बढ़ता है बीमारी का खतरा?

बरसात के मौसम में पशु बाड़ों में नमी और गंदगी  बढ़ जाती है. यही वातावरण बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के पनपने के लिए अनुकूल होता है. एक संक्रमित पशु से दूसरे पशु में बीमारी तेजी से फैल सकती है, जिससे पूरे झुंड के प्रभावित होने का खतरा रहता है. इस दौरान गलघोंटू, लंगड़ी बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियां अधिक देखने को मिलती हैं.

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

बारिश के मौसम में यदि पशु को तेज बुखार, गले या गर्दन में सूजन, सांस लेने में परेशानी, मुंह से अधिक लार आना, आंखों का लाल होना, चारा कम खाना या पूरी तरह छोड़ देना, सुस्ती, टांगों में सूजन या लंगड़ाकर चलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, पशुपालकों को रोजाना अपने पशुओं के व्यवहार, भूख और दूध उत्पादन पर नजर रखनी चाहिए. कई बार शुरुआती लक्षण मामूली लगते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है.

साफ-सफाई और परजीवियों से बचाव है सबसे जरूरी

बरसात के दौरान पशु बाड़े की नियमित सफाई करना बेहद जरूरी है. गंदगी और जमा पानी संक्रमण का बड़ा कारण बनते हैं. इसी मौसम में मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे परजीवी तेजी से बढ़ते हैं, जो पशुओं को कमजोर करने के साथ कई बीमारियां भी फैलाते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, पशु चिकित्सक की सलाह से परजीवी नियंत्रण वाली दवाओं का उपयोग  करना चाहिए. यदि पशु के शरीर पर अधिक किलनी दिखाई दे तो तुरंत उपचार कराना चाहिए. साफ और सूखा बाड़ा रखने से संक्रमण का खतरा काफी कम किया जा सकता है.

समय पर टीकाकरण और देखभाल से मिलेगा पूरा बचाव

बरसात शुरू होने से पहले या शुरुआती दिनों में पशुओं का टीकाकरण कराना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है. गलघोंटू, लंगड़ी बुखार और खुरपका-मुंहपका  जैसी बीमारियों के खिलाफ समय पर टीका लगवाने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, टीकाकरण के बाद भी पशुपालकों को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. पशुओं को संतुलित आहार, साफ पानी और स्वच्छ वातावरण देना जरूरी है. यदि किसी पशु में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर इलाज, नियमित निगरानी और साफ-सफाई अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन पर भी कोई बड़ा असर नहीं पड़ता.

Published: 24 Jul, 2026 | 11:30 PM

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