FMD Care Tips: मानसून में पशुओं को खुरपका-मुंहपका के कहर से बचाने के आसान उपाय

बारिश का मौसम पशुओं के लिए कई संक्रामक बीमारियों का खतरा लेकर आता है. थोड़ी-सी लापरवाही खुरपका-मुंहपका जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है. समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और सही देखभाल अपनाकर पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है. जानिए मानसून में किन जरूरी बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 28 Jun, 2026 | 12:03 PM

Foot and Mouth Disease: बारिश का मौसम शुरू होते ही पशुपालकों को अपने पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इस मौसम में नमी, गंदगी और दूषित वातावरण के कारण कई संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इनमें खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है. यह रोग गाय, भैंस, बकरी और अन्य खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है. समय पर सावधानी और टीकाकरण से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.

बारिश में क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, बारिश के मौसम  में पशुशाला में नमी और गंदगी बढ़ जाती है. यदि पशुओं के रहने की जगह साफ और सूखी न रखी जाए तो वायरस तेजी से फैल सकता है. गंदा पानी, दूषित चारा और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी संक्रमण का खतरा बढ़ा देती है. इसलिए पशुशाला की नियमित सफाई और कीटाणुनाशक का छिड़काव करना बेहद जरूरी है.

खुरपका-मुंहपका के लक्षण कैसे पहचानें?

इस बीमारी की शुरुआत में पशुओं को तेज बुखार आ सकता है. इसके बाद मुंह और खुरों  में छाले बनने लगते हैं. पशु के मुंह से अधिक लार या झाग निकलना, खाना-पीना छोड़ देना, चलने में परेशानी होना और कमजोरी महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हैं. ऐसे संकेत दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना भी जरूरी है ताकि संक्रमण दूसरे पशुओं तक न फैले.

बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

विशेषज्ञ के अनुसार, खुरपका-मुंहपका  से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है. इसके साथ ही पशुओं को हमेशा साफ और सूखी जगह पर रखें. उन्हें स्वच्छ पानी और संतुलित आहार दें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे. पशुशाला में नियमित रूप से कीटाणुनाशक का छिड़काव करें और गंदगी जमा न होने दें. यदि किसी पशु के मुंह या खुरों में घाव दिखाई दें तो उनकी नियमित सफाई करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा या लोशन का उपयोग करें.

समय पर सावधानी से होगा आर्थिक नुकसान से बचाव

खुरपका-मुंहपका बीमारी केवल पशुओं  की सेहत को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों की आय पर भी सीधा असर पड़ता है. इसलिए मौसम बदलते ही टीकाकरण, स्वच्छता और संतुलित आहार जैसी जरूरी बातों का पालन करना चाहिए. थोड़ी-सी सावधानी पशुओं को स्वस्थ रखने के साथ-साथ पशुपालकों को बड़े आर्थिक नुकसान से भी बचा सकती है. यदि किसी पशु में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए पशु चिकित्सक से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम माना जाता है.

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