वैज्ञानिकों की नई क्रॉस ब्रीड ने बदली पशुपालकों की किस्मत, MP के सूकरों की मणिपुर और असम तक बढ़ी मांग

Northeast Demand: मध्यप्रदेश में वैज्ञानिकों द्वारा तैयार उन्नत सूकर नस्ल पशुपालकों के लिए कमाई का शानदार जरिया बन रही है. तेजी से वजन बढ़ाने वाली इस नस्ल की मांग अब असम, मिजोरम और मणिपुर तक पहुंच गई है. कम निवेश और बेहतर मुनाफे के कारण युवा भी तेजी से सूकर पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 9 Apr, 2026 | 11:49 AM

Pig Farming: मध्य प्रदेश में सूकर पालन अब तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला व्यवसाय बनता जा रहा है. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग और नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की रिसर्च से तैयार की गई उन्नत क्रॉस ब्रीड की मांग अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी पहुंच गई है. खास बात यह है कि असम, मिजोरम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में इन सूकरों की सबसे ज्यादा डिमांड देखने को मिल रही है. कम समय में तेजी से वजन बढ़ने और बेहतर मांस उत्पादन के कारण यह नस्ल पशुपालकों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है.

वैज्ञानिकों ने तैयार की उन्नत क्रॉस ब्रीड

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) पशुपालन विभाग के अनुसार, नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तकनीक और रिसर्च के जरिए सूकरों की एक उन्नत क्रॉस ब्रीड  तैयार की है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर नस्ल को देशी सूकरों के साथ क्रॉस कराया. इसके बाद इस नस्ल पर लगातार टीकाकरण, बेहतर रखरखाव, संतुलित आहार और फूड मैनेजमेंट पर काम किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई नस्ल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर है और यह तेजी से बढ़ती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इस नस्ल के सूकरों का मांस उत्पादन अच्छा होने से व्यापारियों और पशुपालकों दोनों को फायदा मिल रहा है.

सिर्फ 9 महीने में 80 किलो तक पहुंच रहा वजन

विश्वविद्यालय के पिग फार्म  (Pig Farming) से मिली जानकारी के अनुसार, इस उन्नत नस्ल का सबसे बड़ा फायदा इसकी तेज ग्रोथ है. जहां सामान्य सूकरों को ज्यादा समय लगता है, वहीं यह क्रॉस ब्रीड केवल 9 महीने में लगभग 80 किलो वजन तक पहुंच रही है. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, तेजी से वजन बढ़ने वाली नस्लें पशुपालकों के लिए ज्यादा लाभदायक होती हैं, क्योंकि इससे कम समय में बिक्री संभव हो जाती है.

वर्तमान में सूकर मांस की कीमत 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पहले करीब 200 रुपये प्रति किलो थी. ऐसे में कम समय में ज्यादा वजन पाने वाले सूकर किसानों की आमदनी को तेजी से बढ़ा रहे हैं. पूर्वोत्तर राज्यों में पोर्क की खपत अधिक होने से वहां से लगातार मांग आ रही है. यही कारण है कि मध्य प्रदेश में तैयार की गई यह नस्ल अब दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंच रही है.

युवा और रिटायर्ड लोग भी अपना रहे सूकर पालन

सूकर पालन अब सिर्फ पारंपरिक पशुपालकों  तक सीमित नहीं है. राज्य में युवा और रिटायर्ड लोग भी इसे रोजगार के रूप में अपना रहे हैं. सेना से रिटायर दादूलाल बसोर ने बताया कि उन्होंने पिछले दो साल से सूकर पालन शुरू किया है और कम निवेश में अच्छी आय हो रही है. इसी तरह पनागर के युवा किसान नवनीत बोरकर ने इंजीनियरिंग के बाद नौकरी तलाशने की बजाय सूकर पालन को चुना. उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से ट्रेनिंग लेकर इस व्यवसाय की शुरुआत की.

ट्रेनिंग के दौरान उन्हें नस्ल की देखरेख, टीकाकरण, भोजन प्रबंधन और फार्म संचालन की पूरी जानकारी दी गई. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग का मानना है कि अगर युवाओं को सही प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ दिया जाए तो सूकर पालन गांवों में रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा पिग फार्मिंग

सूकर पालन आज ग्रामीण परिवारों  के लिए आय का मजबूत जरिया बन रहा है. कम जगह, कम निवेश और जल्दी तैयार होने वाली नस्ल के कारण छोटे किसान और पशुपालक भी इसे आसानी से अपना सकते हैं. मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग (Madhya Pradesh Animal Husbandry) के अधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक टीम लगातार सूकर नस्ल को और उन्नत बनाने पर काम कर रही है. इससे आने वाले समय में उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ने की उम्मीद है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक प्रबंधन को गांव स्तर तक पहुंचाया गया तो मध्य प्रदेश सूकर पालन के क्षेत्र में देश का बड़ा केंद्र बन सकता है. खासकर पूर्वोत्तर राज्यों से बढ़ती मांग ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश के पशुपालकों के लिए यह व्यवसाय भविष्य में और अधिक फायदेमंद साबित होगा.

Published: 9 Apr, 2026 | 11:05 AM

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