सिर्फ 2,000 रुपये का खर्च बचाएगा लाखों का नुकसान! दुधारू पशुओं को थनैला से बचाने का आसान उपाय

दुधारू पशुओं की सही देखभाल नहीं करने से थनैला जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है, जिससे दूध उत्पादन रुक सकता है. पशु चिकित्सकों के अनुसार, लगभग ₹2,000 के रबर बेड का इस्तेमाल पशुओं को सुरक्षित रखता है, संक्रमण का खतरा घटाता है और डेयरी किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाता है.

नोएडा | Updated On: 3 Aug, 2026 | 06:08 PM

Cow Rearing: देश में डेयरी व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है और लाखों किसान दूध उत्पादन से अपनी आय बढ़ा रहे हैं. लेकिन कई बार पशुओं की सही देखभाल नहीं होने के कारण दूध उत्पादन प्रभावित हो जाता है. खासकर दुधारू गाय और भैंस में थनैला (मास्टाइटिस) जैसी बीमारी होने पर पशु दूध देना कम कर देते हैं या पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, यदि दुधारू पशुओं को साफ-सुथरा और आरामदायक स्थान उपलब्ध कराया जाए तथा रबर बेड का उपयोग किया जाए, तो थनैला जैसी गंभीर बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. यह छोटा-सा निवेश पशुपालकों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकता है.

दुधारू पशुओं की लापरवाही पड़ सकती है भारी

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, डेयरी व्यवसाय  में सबसे महत्वपूर्ण बात पशुओं का सही प्रबंधन है. कई पशुपालक केवल चारे और दाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन पशुओं के बैठने और रहने की जगह की सफाई को नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बाद में बड़ी बीमारी का कारण बन जाती है. यदि गाय और भैंस गंदी, ऊबड़-खाबड़ या गीली जगह पर बैठते हैं, तो उनके थनों पर दबाव और रगड़ बढ़ जाती है. इससे थनों में चोट, सूजन और संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है.

थनैला बीमारी से दूध उत्पादन हो सकता है बंद

विशेषज्ञ बताते हैं कि थनैला (मास्टाइटिस) दुधारू पशुओं  की सबसे आम और नुकसानदायक बीमारियों में से एक है. इस बीमारी में थनों में लालिमा, सूजन, दर्द और संक्रमण की समस्या हो जाती है. समय पर उपचार नहीं मिलने पर पशु दूध देना कम कर देता है और गंभीर स्थिति में दूध पूरी तरह सूख भी सकता है. इस बीमारी से न केवल पशु को दर्द और तकलीफ होती है, बल्कि पशुपालक को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसलिए शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

रबर बेड से मिलेगा बड़ा फायदा, खर्च सिर्फ 2,000

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, दुधारू पशुओं  के लिए रबर बेड एक प्रभावी और उपयोगी विकल्प है. रबर बेड पर बैठने से पशुओं के थनों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और चोट लगने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही गंदगी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने का खतरा भी घट जाता है. बाजार में एक रबर बेड लगभग 2,000 रुपये में उपलब्ध है. यह एक बार का निवेश है, लेकिन लंबे समय तक पशुओं को आराम, सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करता है. इससे दूध उत्पादन भी स्थिर बना रहता है और पशुओं की कार्यक्षमता बढ़ती है.

साफ-सफाई और सही देखभाल ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रबर बेड लगाने से ही काम पूरा नहीं होता. पशुओं के रहने की जगह हमेशा साफ, सूखी और हवादार होनी चाहिए. उन्हें संतुलित आहार, पर्याप्त स्वच्छ पानी और नियमित स्वास्थ्य जांच भी मिलनी चाहिए. दूध निकालने से पहले और बाद में थनों की सफाई करना, गोशाला को स्वच्छ रखना और समय-समय पर पशु चिकित्सक  से जांच कराना भी बेहद जरूरी है. यदि पशुपालक इन आसान उपायों को अपनाते हैं, तो थनैला जैसी बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा, पशु स्वस्थ रहेंगे और डेयरी व्यवसाय अधिक लाभदायक बनेगा.

Published: 3 Aug, 2026 | 10:00 PM

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