गर्मी में पशुओं पर बढ़ा लंपी वायरस का खतरा, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

गर्मी के मौसम में गाय और भैंसों में लंपी वायरस का खतरा बढ़ जाता है. यह बीमारी मच्छर, मक्खी और कीड़ों के काटने से तेजी से फैलती है. पशु चिकित्सकों के अनुसार अगर समय पर लक्षण पहचानकर इलाज कराया जाए तो पशुओं को बचाया जा सकता है. साफ-सफाई और टीकाकरण इससे बचाव के सबसे जरूरी उपाय हैं.

नोएडा | Published: 15 Mar, 2026 | 05:28 PM

Lumpy Virus: गर्मी का मौसम शुरू होते ही पशुओं में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इनमें सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है लंपी वायरस, जो खासकर गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं को तेजी से अपनी चपेट में ले लेता है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी पशुओं की जान भी ले सकती है और पशुपालकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, थोड़ी सावधानी और साफ-सफाई से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.

गर्मी में तेजी से फैलता है लंपी वायरस

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, लंपी वायरस  एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंसों में देखी जाती है. गर्मी के मौसम में यह बीमारी ज्यादा फैलती है, क्योंकि इस समय मच्छर, मक्खी और खून चूसने वाले कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है. ये कीड़े जब किसी संक्रमित पशु का खून चूसते हैं और फिर किसी स्वस्थ पशु को काटते हैं, तो वायरस तेजी से फैल जाता है. यही वजह है कि कई बार एक ही गांव या इलाके में एक साथ कई पशु इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं.

कैसे फैलता है यह खतरनाक वायरस

लंपी वायरस सिर्फ कीड़ों के काटने से ही नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित पशु के संपर्क में आने से भी फैल सकता है. बीमार पशु  की लार, नाक से निकलने वाला तरल, दूध या अन्य स्राव के संपर्क में आने से स्वस्थ पशु भी संक्रमित  हो सकते हैं. इसके अलावा अगर पशु एक ही जगह का चारा या पानी इस्तेमाल करते हैं, तो भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. छोटे बछड़ों में यह बीमारी ज्यादा तेजी से असर दिखा सकती है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

पशु चिकित्सकों के अनुसार, अगर समय रहते बीमारी के लक्षण  पहचान लिए जाएं तो पशु को बचाया जा सकता है. लंपी वायरस होने पर पशु में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. सबसे पहले पशु को तेज बुखार आता है और उसके शरीर की त्वचा पर छोटी-छोटी गांठें बनने लगती हैं. कई बार ये गांठें 2 से 5 सेंटीमीटर तक बड़ी हो जाती हैं. इसके अलावा पशु के मुंह से लार या झाग निकलना, आंख और नाक से पानी आना, भूख कम होना और कमजोरी महसूस होना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं. दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी होता है.

बचाव के लिए साफ-सफाई और टीकाकरण जरूरी

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम का कहना है कि लंपी वायरस से बचने का सबसे आसान तरीका साफ-सफाई और टीकाकरण है. जहां पशुओं को रखा जाता है, वहां की नियमित सफाई बहुत जरूरी है. पशुओं के आसपास गंदगी  नहीं रहने देनी चाहिए, क्योंकि गंदगी में ही मच्छर और मक्खियां ज्यादा पनपते हैं. इसके अलावा पशुओं के रहने की जगह पर समय-समय पर कीटनाशक दवा का छिड़काव भी करना चाहिए. अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न फैले. साथ ही पशुओं का समय पर टीकाकरण कराना भी बहुत जरूरी है.

लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाएं

पशु चिकित्सकों के अनुसार, अगर समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो अधिकतर मामलों में 6 से 7 दिन के भीतर पशु ठीक हो सकता है. लेकिन अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए या समय पर इलाज न मिले, तो कई बार पशु की जान भी जा सकती है. इसलिए पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि जैसे ही पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठ या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय में जाकर इलाज कराएं. विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता, साफ-सफाई और समय पर इलाज ही लंपी वायरस से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है. अगर पशुपालक इन बातों का ध्यान रखें, तो वे अपने पशुओं को स्वस्थ  रख सकते हैं और बड़े नुकसान से भी बच सकते हैं.

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