भीषण गर्मी से पहले पशुपालक कर लें ये तैयारियां, पशु नहीं होंगे बीमार और दूध भी बढ़ेगा

Animal Care: भीषण गर्मी में पशुओं को लू और हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने जरूरी सलाह दी है. साफ शेड, ठंडा पानी, हवादार जगह और नियमित डॉक्टर की जांच से पशु स्वस्थ रहेंगे. इससे दूध उत्पादन बेहतर रहेगा और बीमारियों का खतरा कम होगा. समय पर देखभाल से पशुपालकों की आय भी बढ़ेगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 10 Apr, 2026 | 03:56 PM

Dairy Farming: गर्मी जैसे-जैसे तेज हो रही है, वैसे-से इसका असर सिर्फ इंसानों पर नहीं बल्कि पशुओं पर भी साफ दिखने लगा है. दोपहर की तेज धूप, गर्म हवाएं और बंद जगहों में उमस दुधारू पशुओं के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को साफ कहा है कि अगर समय रहते इंतजाम नहीं किए गए, तो पशुओं में हीट स्ट्रोक, भूख कम लगना, दूध घटना और बीमारी बढ़ना जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ सकती हैं. ऐसे में थोड़ी सी सावधानी पशुओं की सेहत बचाने के साथ दूध उत्पादन को भी बेहतर रख सकती है. विभाग की सलाह है कि पशुओं को ठंडी, साफ, हवादार और छायादार जगह में रखें ताकि वे लू के असर से सुरक्षित रहें.

शेड, छांव और ठंडी हवा से मिलेगी सबसे बड़ी राहत

पशुपालन विभाग के अनुसार गर्मियों में सबसे जरूरी है कि पशुओं को खुले धूप  वाले स्थान पर बांधने की बजाय शेड या हवादार बाड़े में रखा जाए. शेड में हवा आने-जाने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. खिड़की और दरवाजों पर बोरी, टाट या जूट की पट्टी टांगकर उस पर समय-समय पर पानी का छिड़काव करते रहें, इससे अंदर का तापमान काफी कम रहता है. अगर संभव हो तो पंखा, कूलर या फॉगिंग जैसी व्यवस्था करें. भैंसों और गायों के लिए दोपहर के समय खासतौर पर ठंडक जरूरी होती है, क्योंकि ज्यादा गर्मी से उनका शरीर जल्दी प्रभावित होता है. यही छोटी-छोटी व्यवस्थाएं उन्हें हीट स्ट्रोक से बचाने में सबसे ज्यादा मदद करती हैं.

पानी, हरा चारा और नहलाना है गर्मी में जरूरी

गर्मी के मौसम में पशुओं  को बार-बार साफ और ठंडा पानी देना बहुत जरूरी है. विभाग की सलाह है कि दिन में कई बार पानी पिलाएं ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे. दुधारू पशुओं को हरा चारा, मिनरल मिक्स और संतुलित आहार दें, क्योंकि गर्मी में उनकी भूख कम हो जाती है. ऐसे समय में सूखे चारे के साथ हरा चारा देना ज्यादा फायदेमंद रहता है. भैंसों को शाम के समय पानी से नहलाना या तालाब में कुछ देर छोड़ना भी अच्छा माना गया है. इससे शरीर की गर्मी कम होती है और दूध उत्पादन पर असर कम पड़ता है. अगर पशु ज्यादा हांफ रहा हो, लार गिर रही हो या सुस्त दिखे, तो यह लू का संकेत हो सकता है.

बीमारी से बचाव के लिए डॉक्टर और टीकाकरण जरूरी

भीषण गर्मी में पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता  भी कमजोर हो सकती है. इसलिए पशुपालन विभाग ने साफ कहा है कि टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच में लापरवाही न करें. अगर पशु खाना कम खा रहा है, तेज सांस ले रहा है, बार-बार बैठ रहा है या दूध अचानक कम हो गया है, तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें. गर्मी में पानी की कमी से कई बार बुखार, दस्त और संक्रमण की समस्या भी बढ़ जाती है. इसलिए बाड़े की सफाई, सूखी जगह और मच्छर-मक्खियों से बचाव का इंतजाम जरूर रखें. समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह पशुओं को बड़ी बीमारी से बचा सकती है.

थोड़ी सावधानी से बढ़ेगा दूध और बचेगा पशुधन

पशुपालन विभाग का कहना है कि गर्मियों में पशुओं की सही देखभाल  सीधे तौर पर दूध उत्पादन और उनकी सेहत से जुड़ी होती है. अगर पशु आरामदायक माहौल में रहेगा, पर्याप्त पानी पिएगा और संतुलित चारा खाएगा, तो वह तनाव में नहीं आएगा. इससे न सिर्फ दूध की मात्रा बेहतर रहेगी, बल्कि पशु बीमार भी कम पड़ेगा. गांवों में कई पशुपालक आज भी शेड, पानी और ठंडी हवा की छोटी व्यवस्थाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका नुकसान बाद में उठाना पड़ता है. इसलिए इस गर्मी में पशुओं की सुरक्षा को जिम्मेदारी समझकर जरूरी इंतजाम करना ही समझदारी है. इससे पशुधन सुरक्षित रहेगा और पशुपालक की आय भी बनी रहेगी.

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