पशुओं के प्रसव में छोटी गलती पड़ सकती है भारी, सुरक्षित प्रसव के आसान नियम हर पशुपालक जरूर जानें

पशुओं के प्रसव के समय थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है. सही जगह, साफ-सफाई और समय पर देखभाल बेहद जरूरी होती है. अगर पशुपालक कुछ आसान नियमों का पालन करें, तो मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रह सकते हैं और प्रसव बिना किसी परेशानी के पूरा हो सकता है.

नोएडा | Published: 22 Mar, 2026 | 01:40 PM

Animal Care: जब घर में नया पशु जन्म लेने वाला होता है, तो पशुपालकों के लिए यह खुशी का पल होता है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. कई बार छोटी-छोटी गलतियों के कारण पशु और उसके बच्चे की जान पर खतरा बन जाता है. बिहार पशुपालन विभाग के अनुसार, अगर कुछ आसान नियमों का पालन किया जाए, तो पशुओं का प्रसव सुरक्षित और बिना परेशानी के हो सकता है.

प्रसव से पहले साफ और अलग जगह जरूरी

बिहार पशुपालन विभाग का कहना है कि जब भी पशु के प्रसव का समय नजदीक  आए, तो उसे बाकी पशुओं से अलग कर देना चाहिए. उसे एक साफ, सूखी और हवादार जगह पर बांधना जरूरी है. गंदगी और नमी वाली जगह पर प्रसव होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मां और बच्चे दोनों की सेहत खराब हो सकती है. इसलिए पहले से ही साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, ताकि प्रसव के समय कोई परेशानी न हो.

प्रसव के समय पशु को परेशान न करें

कई बार पशुपालक घबराहट में बार-बार पशु के पास जाते हैं या उसे छेड़ते हैं, जिससे पशु तनाव में आ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के दौरान पशु को ज्यादा परेशान नहीं करना चाहिए. अगर पानी की थैली दिखने के बाद भी 2 से 3 घंटे तक बच्चा बाहर नहीं आता, तभी पशु चिकित्सक  को बुलाना चाहिए. खुद से हाथ डालकर बच्चा खींचने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे पशु और बच्चे दोनों को गंभीर नुकसान हो सकता है.

जन्म के तुरंत बाद बच्चे की सही देखभाल जरूरी

जब बच्चा पैदा हो जाए, तो सबसे पहले उसकी नाक और मुंह साफ करना जरूरी है, ताकि वह आसानी से सांस ले सके. इसके बाद आधे घंटे के भीतर उसे मां का पहला गाढ़ा दूध यानी खीस जरूर पिलाना चाहिए. यह दूध बच्चे की ताकत  बढ़ाता है और उसे बीमारियों से बचाता है. अगर यह काम समय पर नहीं किया गया, तो बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.

सही जानकारी से बच सकते हैं बड़े नुकसान से

पशुपालन विभाग  के अनुसार, ज्यादातर समस्याएं जानकारी की कमी के कारण होती हैं. अगर पशुपालक पहले से तैयार रहें और सही नियमों का पालन करें, तो प्रसव के दौरान होने वाली दिक्कतों से बचा जा सकता है. समय पर डॉक्टर को बुलाना, साफ-सफाई रखना और पशु को आराम देना, ये छोटे-छोटे कदम बड़े नुकसान से बचा सकते हैं. इसके साथ ही गांवों में इस तरह की जानकारी साझा करना भी जरूरी है, ताकि हर पशुपालक जागरूक हो सके.

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