अब छत और आंगन बनेगा चारा फार्म, 7-10 दिन में तैयार होगा ताजा हरा पशु आहार
खेत और जमीन की कमी अब पशुपालकों के लिए बड़ी परेशानी नहीं! हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से बिना मिट्टी, कम जगह में मक्का, गेहूं और जौ से हरा चारा तैयार किया जा सकता है. करीब 7 से 10 दिन में चारा तैयार होता है और 1 किलो मक्के से 10-12 किलो तक चारा मिल सकता है.
Hydroponic Green Fodder: पशुओं के लिए हरा चारा तैयार करने के लिए हमेशा बड़े खेत या ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती. अगर आपके पास खेती की जमीन कम है या हरा चारा उगाने के लिए जगह नहीं है, तो हाइड्रोपोनिक्स तकनीक आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है. इस विधि से घर के आंगन, छत या किसी छोटे खाली स्थान पर ट्रे अथवा जूट की बोरी की मदद से हरा चारा तैयार किया जा सकता है.
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होती. मक्का, गेहूं, जौ, बाजरा और जई जैसे अनाज को अंकुरित करके कुछ ही दिनों में पशुओं के लिए ताजा हरा चारा तैयार किया जा सकता है. पशु चिकित्सक धनश्याम कुवर के अनुसार, सीमित जमीन वाले पशुपालकों के लिए यह तकनीक चारे की उपलब्धता बढ़ाने का एक आसान विकल्प हो सकती है.
1. 1 किलो मक्के से मिल सकता है 10-12 किलो हरा चारा
हाइड्रोपोनिक्स विधि में कम मात्रा में अनाज का इस्तेमाल करके अपेक्षाकृत ज्यादा मात्रा में हरा चारा तैयार किया जा सकता है. करीब 1 किलो मक्के से 10 से 12 किलो तक हरा चारा तैयार होने की संभावना रहती है. हालांकि वास्तविक उत्पादन बीज की गुणवत्ता, पानी, तापमान, नमी और देखभाल जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है. इस वजह से कम जगह में पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में ताजा चारा तैयार करने की सुविधा मिल सकती है. खासकर छोटे पशुपालकों के लिए यह तरीका उपयोगी हो सकता है.
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2. 7 से 10 दिन में तैयार हो जाता है चारा
हाइड्रोपोनिक्स से चारा तैयार करने के लिए सबसे पहले मक्का, गेहूं, जौ या जई जैसे अच्छे गुणवत्ता वाले अनाज का चुनाव किया जाता है. बीजों को साफ पानी में भिगोकर कुछ समय के लिए रखा जाता है, जिससे उनमें अंकुर निकलने लगते हैं. इसके बाद अंकुरित बीजों को ट्रे या जूट की बोरी में फैलाया जाता है. नियमित नमी और उचित देखभाल के साथ करीब 7 से 10 दिन में हरा चारा तैयार हो सकता है. तैयार चारे में जड़, तना और हरी पत्तियां शामिल होती हैं, जिन्हें पशुओं को आहार के हिस्से के रूप में दिया जा सकता है.
3. बिना मिट्टी के घर पर ही उगाएं हरा चारा
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें खेत या उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती. पशुपालक घर के आंगन, छत, शेड या किसी छोटे खाली स्थान पर ट्रे लगाकर चारा तैयार कर सकते हैं. कम जगह में उत्पादन होने के कारण यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है, जिनके पास पशु हैं लेकिन चारा उगाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है. नियमित रूप से ट्रे में चारा तैयार करके पशुओं के लिए ताजा हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखी जा सकती है.
4. पशुओं के आहार में हो सकता है उपयोगी
हाइड्रोपोनिक्स विधि से तैयार हरे चारे में पौधे के अंकुर, जड़, तना और पत्तियां शामिल होती हैं. इसमें मौजूद पोषक तत्व पशुओं के संतुलित आहार में हरे चारे की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं. पशु चिकित्सक धनश्याम कुवर के अनुसार, हाइड्रोपोनिक चारे को पशुओं के नियमित आहार में शामिल करने से पहले उनकी प्रजाति, उम्र, दूध उत्पादन और अन्य आहार को ध्यान में रखना जरूरी है. इस तकनीक से घर के पास ताजा चारा उपलब्ध होने से बाजार से हरा चारा खरीदने पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है.