कश्मीर में ओलावृष्टि ने सेब किसानों की तोड़ी कमर… 50 फीसदी नुकसान, फसल बीमा की मांग तेज

Kashmir Hailstorm Damage: कश्मीर घाटी में लगातार हो रही ओलावृष्टि ने सेब के बागों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. पिछले एक महीने में कई बार ओले गिरने से फसलें प्रभावित हुई हैं और कई जगह 40 से 50 प्रतिशत तक नुकसान दर्ज किया गया है. सेब कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन अब बागवानों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 3 Jun, 2026 | 04:55 PM

Kashmir Hailstorm Damage: कश्मीर घाटी में पिछले एक महीने से रुक-रुककर हो रही ओलावृष्टि ने सेब किसानों की चिंता बढ़ा दी है. IMD के अनुसार, इस दौरान घाटी में कम से कम सात बार ओले गिरे हैं, जिससे सेब के बागों को काफी नुकसान हुआ है. कई जगहों पर फलों, पत्तियों और नए पौधों की कोपलों को भी नुकसान पहुंचा है. इस वजह से घाटी की बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है.

सेब उद्योग पर भारी दबाव

ऑल कश्मीर फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने बिजनेस लाइन से कहा कि अभी नुकसान का पूरा सही अंदाजा नहीं लगाया जा सका है. लेकिन लगातार हो रही ओलावृष्टि से सेब की फसल को काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना न होने की वजह से सेब उत्पादक मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के सामने पूरी तरह असुरक्षित हैं.

कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सेब

कश्मीर का सेब उद्योग सिर्फ खेती नहीं है, बल्कि पूरे इलाके की कमाई का बड़ा जरिया है. इससे हर साल करीब 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. करीब 35 लाख लोग इसी काम से सीधे या किसी न किसी तरीके से अपनी कमाई करते हैं. इसलिए मौसम की वजह से अगर नुकसान होता है तो पूरे इलाके की कमाई और लोगों की जिंदगी पर असर पड़ता है. दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के किसानों का कहना है कि हाल ही में बहुत तेज ओलावृष्टि हुई. कई जगहों पर बड़े-बड़े ओले गिरे, जिससे पेड़ों पर लगे सेब बहुत ज्यादा गिर गए.  इस वजह से करीब 45 फीसदी फसल खराब हो गई है.

फसल बीमा योजना पर अब भी इंतजार

सरकार ने फरवरी के बजट में सेब, केसर और लीची जैसी फसलों को बीमा देने की बात कही थी. लेकिन अभी तक यह योजना लागू नहीं हो पाई है. 23 मई को कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सरकार अगले दो महीनों में ‘रीस्ट्रक्चर्ड वेदर बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (RWBCIS)’ यानी मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू करेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि, इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी जल्द शुरू कर दी जाएगी.

बीमा कंपनियों की रुचि बनी बाधा

सरकार ने मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) को पहले भी कई बार शुरू करने की कोशिश की, लेकिन बीमा कंपनियों ने इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई. फरवरी में सरकार ने विधानसभा को बताया था कि दो कंपनियां Agriculture Insurance Company of India और Tata AIG General Insurance ने सबसे कम बोली लगाई थी. इन्हें जम्मू-कश्मीर में सेब और केसर जैसी फसलों के लिए योजना लागू करने के लिए चुना गया था.

इसके तहत:

  • कश्मीर डिवीजन में सेब और केसर के लिए 4 बोली आईं
  • जम्मू डिवीजन में दूसरी फसलों के लिए 5 बोली आईं
  • जांच के बाद इन कंपनियों को अलग-अलग क्लस्टर (K1, K2, K3 और J1) में काम देने का फैसला हुआ

लेकिन बीमा कंपनियों ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाई. कुछ कंपनियों ने ज्यादा प्रीमियम दरों की वजह से आगे प्रस्ताव नहीं बढ़ाया. बताया जा रहा है कि प्रीमियम 30 फीसदी से ज्यादा होने के कारण मामला अटक गया.

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