Bihar Sugarcane Subsidy 2026: बिहार के गन्ना किसानों के लिए सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है. खेती में बढ़ती मजदूरी, मजदूरों की कमी और लगातार बढ़ रही लागत को देखते हुए राज्य सरकार ने आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर 80 फीसदी तक सब्सिडी देने की योजना शुरू की है. यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए गन्ना उद्योग विभाग की ओर से शुरू की गई है. सरकार का मकसद किसानों को आधुनिक मशीनों से जोड़ना है, ताकि गन्ने की खेती में मेहनत और खर्च दोनों कम हों. साथ ही, मशीनों के इस्तेमाल से खेती का काम समय पर पूरा हो और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिले.
44 तरह के कृषि यंत्र योजना में शामिल
गन्ना किसानों के लिए शुरू की गई इस योजना में कुल 44 तरह के कृषि यंत्रों को शामिल किया गया है. किसान अपनी जरूरत के हिसाब से इन मशीनों की खरीद कर सकते हैं. व्यक्तिगत किसानों को अलग-अलग कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा. वहीं, फसल अवशेष प्रबंधन और गन्ने के सेट उपचार से जुड़े यंत्रों पर सरकार की ओर से 75 से 80 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी. इससे किसानों को महंगे कृषि उपकरण खरीदने में बड़ी राहत मिल सकती है.
किन किसानों को मिलेगा लाभ?
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से गन्ना किसानों को दिया जाएगा. व्यक्तिगत किसान निर्धारित कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. खास बात यह है कि, 20 हजार रुपये तक के अनुदान के लिए लगान रसीद जरूरी नहीं होगी. वहीं, 20 हजार रुपये से ज्यादा के अनुदान के लिए किसान को LPC या मालगुजारी रसीद देनी होगी.
बटाई पर खेती करने वाले गैर-रैयत किसान भी 20 हजार रुपये तक के अनुदान के लिए पात्र होंगे. इससे उन किसानों को भी आधुनिक मशीनों का फायदा मिल सकेगा, जिनके नाम पर जमीन का मालिकाना हक नहीं है.
यंत्र बैंक बनाने पर 80 फीसदी तक सब्सिडी
इस योजना में किसानों के समूह के लिए भी खास प्रावधान किया गया है. अगर कई किसान मिलकर यंत्र बैंक बनाते हैं, तो उन्हें कृषि मशीनों की खरीद पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है. इसके तहत अधिकतम 8 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है. यंत्र बैंक का फायदा यह होगा कि, किसान महंगी मशीनें सामूहिक रूप से खरीद सकेंगे. इसके बाद इन मशीनों को जरूरत के हिसाब से दूसरे किसानों को किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई भी की जा सकती है.
ये समूह बना सकते हैं यंत्र बैंक
सरकार ने यंत्र बैंक स्थापित करने के लिए कई संस्थाओं और किसान समूहों को पात्र बनाया है. इनमें PACS, जीविका समूह, FPO, ATMA से जुड़े किसान समूह, सहकारी समितियां, चीनी मिलें और अधिकृत गुड़ उत्पादक शामिल हैं. इसके अलावा गन्ने से जुड़ी सरकारी संस्थाएं भी इस सुविधा का लाभ उठा सकती हैं. इससे गांवों में कृषि मशीनें आसानी से उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है.
DBT से सीधे खाते में आएगी सब्सिडी
योजना की एक खास बात यह है कि, अनुदान की राशि किसानों के बैंक खाते में DBT के जरिए सीधे भेजी जाएगी. इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और भुगतान में पारदर्शिता बनी रहेगी. किसान अपनी जरूरत के मुताबिक अधिकृत विक्रेताओं से कृषि यंत्र खरीद सकेंगे. आवेदन से लेकर सत्यापन और भुगतान तक की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है.
सरकार का मानना है कि आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से गन्ना किसानों की उत्पादन लागत कम करने, मजदूरों पर निर्भरता घटाने और खेती को आसान बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही, यंत्र बैंक के जरिए किसान खेती के साथ मशीनें किराए पर देकर अतिरिक्त आय का जरिया भी बना सकते हैं.