Budget 2026: क्या अन्नदाता की जेब में आएगा ज्यादा पैसा? जानिए बजट से कृषि क्षेत्र को क्या हैं उम्मीदें
क्या इस बार अन्नदाता की मेहनत का मिलेगा पूरा मोल? खाद-बीज की महंगाई और मौसम की मार के बीच, 1 फरवरी को सरकार के पिटारे से किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी निकल सकती है. सम्मान निधि से लेकर सस्ते कर्ज तक, जानिए वो 7 बड़े ऐलान जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत.
Farmers Expectations From Budget 2026 : भारत की आत्मा गांवों में बसती है और उस आत्मा की धड़कन हमारे किसान हैं. सर्दी हो या गर्मी, खेत में पसीना बहाकर देश का पेट भरने वाले अन्नदाता की नजरें अब कैलेंडर की 1 फरवरी पर टिकी हैं. बजट 2026-27 आने वाला है और हर गली-चौपाल पर बस एक ही चर्चा है कि क्या इस बार खेती-किसानी के दिन बहुरेंगे? बढ़ती महंगाई, खाद-बीज के ऊंचे दाम और कभी सूखा तो कभी बेमौसम बारिश ने किसान की कमर तोड़ दी है. ऐसे में यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों के सपनों और उनकी मेहनत का हिसाब-किताब है. चलिए जानते हैं कि इस बार बजट से किसान किन 5 बड़े बदलावों की आस लगाए बैठे हैं.
फसल का बीमा
आजकल मौसम का कोई भरोसा नहीं रह गया है. कभी अचानक ओले गिर जाते हैं तो कभी तपती गर्मी खड़ी फसल को जला देती है. किसानों की पहली और सबसे बड़ी उम्मीद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Prime Minister Crop Insurance Scheme) को लेकर है. किसान चाहते हैं कि बीमा का क्लेम मिलना आसान हो. अक्सर देखा गया है कि नुकसान होने पर सर्वे में महीनों लग जाते हैं और पैसा मिलने तक किसान कर्ज में डूब जाता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2025-26 की बात करें तो केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लिए कुल 69,515.71 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था. बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार इस रकम को बढ़ाए और ऐसी तकनीक लाए जिससे नुकसान का सही आकलन हो और क्लेम का पैसा सीधा बैंक खाते में बिना किसी देरी के पहुंच जाए.
पानी की किल्लत
देश के बहुत से इलाकों में आज भी खेती केवल बारिश के भरोसे है. किसानों को उम्मीद है कि इस बजट में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Prime Minister Agricultural Irrigation Scheme) का बजट बढ़ाया जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बजट 2025-26 में PMKSY को प्राथमिकता देते हुए सूक्ष्म सिंचाई के लिए फंड जारी रखा गया है. कमान क्षेत्र विकास हेतु 1600 करोड़ और 100 जिलों में नई सिंचाई तकनीकें लागू हुई थी. लेकिन अब किसान चाहते हैं कि उनके खेतों तक नहर का पानी पहुंचे, ड्रिप सिंचाई के लिए सब्सिडी मिले और गांवों में पुराने तालाबों को फिर से जीवित किया जाए. अगर पानी की पक्की व्यवस्था हो जाए, तो किसान साल में दो के बजाय तीन फसलें उगा सकता है.
सस्ता कर्ज
खेती के खर्चे जैसे डीजल, मजदूरी और खाद के दाम आसमान छू रहे हैं. ऐसे में किसान को बुवाई के समय पैसे की सख्त जरूरत होती है. रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बजट 2025-26 में कृषि ऋण लक्ष्य बढ़ाकर 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक किया गया था. किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 3 लाख तक ऋण पर ब्याज अनुदान जारी किया गया था. बजट 2026 से उम्मीद है कि खेती ऋण (Agriculture Loan) का लक्ष्य बढ़ाया जाएगा और ब्याज दरों में और कमी की जाएगी. अगर बैंकों से सस्ता कर्ज आसानी से मिल जाए, तो किसानों को गांव के साहूकारों के पास नहीं जाना पड़ेगा, जो भारी ब्याज वसूलते हैं. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सीमा बढ़ाने की भी बड़ी उम्मीद है.
कमाई का नया रास्ता
आज भारत का चावल, फल और सब्जियां विदेशों में पसंद की जा रही हैं, लेकिन इसका फायदा छोटे किसानों तक नहीं पहुंच पाता. बजट 2026 में अगर सरकार गांवों के पास ही कोल्ड स्टोरेज (शीत गृह) और फूड प्रोसेसिंग यूनिट (फसल प्रसंस्करण केंद्र) लगाने के लिए पैसा दे, तो किसान की फसल खराब नहीं होगी. किसान चाहते हैं कि उनके अनाज को सीधा एक्सपोर्ट (निर्यात) करने की सुविधा मिले ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अच्छे दाम मिल सकें.
सम्मान निधि
पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) की किस्त किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होती. लेकिन महंगाई के इस दौर में 6000 रुपये सालाना की राशि अब कम पड़ने लगी है. इस बार बजट से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सरकार इस राशि को बढ़ा कर 8000 कर दी जाए. अगर खाद और बीज की महंगाई को देखते हुए यह मदद थोड़ी और बढ़ जाती है, तो किसान को बुवाई के वक्त किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा.