PM सूर्य घर योजना का कमाल, रूफटॉप सोलर का बड़ा असर.. बिजली बिल 71 फीसदी घटा

CEEW Solar Report: भारत में रूफटॉप सोलर अपनाने से लोगों के बिजली बिल में औसतन 71 फीसदी तक की कमी आई है. पीएम सूर्य घर योजना के चलते सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और लाखों परिवार इसे अपना रहे हैं क्योंकि इससे बिजली खर्च काफी घट जाता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jun, 2026 | 06:00 AM

PM Surya Ghar Yojana: काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) के एक पूरे देश में किए गए सर्वे में पता चला है कि रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले परिवारों के बिजली बिल में औसतन 71 फीसदी तक की कमी आई है. इसका मतलब है कि जिन घरों में सोलर सिस्टम लगा है, वहां हर महीने बिजली का खर्च काफी कम हो गया है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि, सोलर लगाने की सोच रखने वाले 81 फीसदी लोग ऐसा इसलिए करना चाहते हैं ताकि उनका बिजली बिल कम हो सके. इससे साफ है कि सौर ऊर्जा अब सिर्फ एक विकल्प नहीं रही, बल्कि लोगों के लिए पैसे बचाने का एक आसान और असरदार तरीका बनती जा रही है.

पीएम सूर्य घर योजना से तेजी से बढ़ रहा सोलर अपनाना

यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PMSGY) के दो साल पूरे होने पर जारी किया गया है. इस योजना ने देश में रूफटॉप सोलर के उपयोग को तेजी से बढ़ाया है. CEEW की रिपोर्ट में 22 राज्यों के 308 जिलों के 17,000 से अधिक परिवारों को शामिल किया गया. आंकड़ों के मुताबिक, भारत में आवासीय सोलर सेक्टर की ग्रोथ 2017 से 2023 के बीच 45 फीसदी सालाना रही थी, जो 2024 से 2026 के दौरान बढ़कर 85 फीसदी तक पहुंच गई है.

सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी और संभावित चुनौतियां

हालांकि देश में सौर ऊर्जा का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन एक रिपोर्ट में चिंता भी जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030-31 तक भारत में सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन कम हो सकता है, भले ही बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम में कोई बड़ी समस्या न हो.vअगर कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को कम से कम 55 फीसदी क्षमता पर लगातार चलाया जाता है, तो देश में 68 से 115 गीगावाट तक अतिरिक्त बिजली पैदा हो सकती है. ऐसी स्थिति में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन कुछ हद तक कम करना पड़ सकता है.

वैश्विक स्तर पर सोलर मार्केट में बड़ा बदलाव

दुनिया भर में सौर ऊर्जा का बाजार तेजी से बदल रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास हर साल करीब 1000 गीगावाट सोलर पैनल बनाने की क्षमता है, लेकिन मांग कम होने और कीमतें गिरने की वजह से कई फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं. यह स्थिति एक तरफ वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती है, तो दूसरी तरफ मौका भी है, क्योंकि सस्ते सोलर पैनल स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बदलाव को और तेज कर सकते हैं.

बैटरी स्टोरेज पर फोकस कर रहीं चीनी कंपनियां

सोलर पैनल की मांग में कमी आने के बाद चीन की बड़ी कंपनियां अब बैटरी और ऊर्जा स्टोरेज के क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. डेटा सेंटर और बिजली स्टोर करने की बढ़ती जरूरत को देखते हुए ये कंपनियां बैटरी का निर्यात बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं. हाल ही में चीन में एक बड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के साथ एक विशाल ऊर्जा भंडारण सिस्टम भी शुरू किया गया है. इससे हर साल 450 गीगावाट-घंटे से ज्यादा सौर ऊर्जा का इस्तेमाल संभव होगा और कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आने की उम्मीद है.

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Published: 18 Jun, 2026 | 06:00 AM

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