गांव-गांव पहुंचेगी सहकारी ताकत, 2058 PACS सुधार और 515 नई समितियों से किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को मजबूत करने के लिए सहकारिता क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है. 2058 PACS के पुनर्गठन और 515 नई समितियों की शुरुआत से गांवों में ऋण, खाद-बीज, भंडारण और खरीद जैसी सेवाएं आसान होंगी. ये पहल किसानों की आय बढ़ाने, पारदर्शिता लाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है.
छत्तीसगढ़ में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहकारिता के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य में 2,058 प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) का पुनर्गठन किया गया है, वहीं 515 नई सहकारी समितियों की शुरुआत भी की गई है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सहकार से समृद्धि के विजन के तहत इस पहल को आगे बढ़ाया. माना जा रहा है कि इससे गांवों में किसानों को कर्ज, खाद-बीज, भंडारण और खरीद जैसी सुविधाएं पहले से ज्यादा आसान और तेज मिलेंगी.
PACS को मजबूत करने की बड़ी तैयारी
छत्तीसगढ़ सरकार और सहकारिता मंत्रालय ने मिलकर राज्य की PACS व्यवस्था को नए रूप में तैयार किया है. PACS को गांवों की सहकारी व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यही समितियां किसानों को कम समय का कृषि ऋण, खाद-बीज और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं. काफी समय से कई समितियां कामकाज की सुस्ती, वित्तीय कमजोरी और पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं. अब सरकार ने इनके ढांचे में बदलाव कर इन्हें ज्यादा मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम शुरू किया है. इस पुनर्गठन से समितियों का कामकाज आसान होगा और किसानों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंच सकेगा.
515 नई समितियों से गांवों में बढ़ेगी पहुंच
सरकार ने सिर्फ पुरानी समितियों को मजबूत करने पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि 515 नई सहकारी समितियां भी शुरू की हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को मिलेगा जहां अब तक किसानों को सहकारी सेवाएं आसानी से नहीं मिल पाती थीं. नई समितियों के बनने से दूर-दराज के गांवों में रहने वाले किसानों को अब ऋण, खाद, बीज, कृषि उपकरण और सरकारी खरीद जैसी सेवाओं के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को उसके गांव या नजदीकी क्षेत्र में ही जरूरी सुविधाएं मिलें. विशेषज्ञ का मानना है कि नई समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान डालेंगी और छोटे किसानों को संस्थागत मदद मिलने से उनकी खेती की लागत भी कम हो सकती है.
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डिजिटलीकरण से काम होगा तेज और पारदर्शी
इस पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा PACS का डिजिटलीकरण है. सहकारिता मंत्रालय देशभर में PACS को कंप्यूटराइज करने पर जोर दे रहा है और छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. डिजिटल व्यवस्था आने से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, कर्ज वितरण में देरी कम होगी और खरीद-बिक्री से जुड़े कामों में पारदर्शिता बढ़ेगी. इससे किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. ऑनलाइन रिकॉर्ड और तेज प्रोसेसिंग से गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी. सरकार का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से PACS को बैंकिंग और अन्य वित्तीय संस्थानों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा. इससे किसानों को समय पर भुगतान और आसान ऋण सुविधा मिल पाएगी.
सिर्फ कर्ज नहीं, अब मल्टी-सर्विस सेंटर बनेंगी समितियां
नई सोच के तहत PACS को अब सिर्फ कर्ज देने वाली संस्था नहीं, बल्कि मल्टी-सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है. यानी किसान एक ही जगह से कई तरह की सुविधाएं ले सकेंगे. इन समितियों के जरिए अब खाद-बीज वितरण, फसल भंडारण, सरकारी खरीद, कृषि उत्पादों की मार्केटिंग और वैल्यू एडेड सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी और गांवों की सप्लाई चेन भी मजबूत होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सुधारों से किसानों की साहूकारों पर निर्भरता कम होगी, बाजार तक पहुंच बेहतर होगी और गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. सबसे बड़ी बात यह है कि सहकारी संस्थाओं पर लोगों का भरोसा फिर से मजबूत होगा.