लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल से सहकारी संघ तैयार कर रहा नए बिजनेस लीडर्स!

देश की करीब 65 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. वहीं करीब 59 प्रतिशत लोग खेती के क्षेत्र में कार्यरत हैं. ऐसे में साफ है कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद में करीब 25 से 30 फीसदी का योगदान देती है.

Kisan India
Noida | Updated On: 20 Mar, 2025 | 03:32 PM

हाल ही में सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सदन में एक नया मंत्र दिया है ‘सहकार से समृद्धि’ जिसके जरिए सहकारिता समितियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का काम करेगी. अब भारतीय राष्‍ट्रीय सहकारी संघ (NCUI) इस दिशा में काम करने में लग गया है. आपको बता दें कि 21 मई 2023 को गुजरात के बनासकांठा में और पंचमहल जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) इस पर आधारित एक पायलट परियोजना शुरू की गई थी. इसका मकसद ग्रामीण सहकारी बैंकों के साथ प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों (पीडीसीएस) के सभी वित्तीय लेन-देन को बढ़ावा देना और सहकारी क्षेत्र को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है.

सहकारिता गांव के लिए जरूरी

NCUI & IFFCO के प्रेसीडेंट दिलीप संघानी की मानें तो ‘सहकार से समृद्धि’ सिर्फ नारा ही नहीं बल्कि सहकारी मॉडल का भी प्रतीक है. भारत जिसकी अर्थव्‍यवस्‍था मुख्‍यत तौर पर खेती पर आधारित है. देश की करीब 65 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. वहीं करीब 59 प्रतिशत लोग खेती के क्षेत्र में कार्यरत हैं. ऐसे में साफ है कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद में करीब 25 से 30 फीसदी का योगदान देती है. गांव की इकॉनमी मुख्‍य तौर पर खेती, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यवसायों की मदद से संचालित होती है. इसके बाद भी किसान अक्सर कम आय, ज्‍यादा कर्ज और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझते हैं. सहकारी समितियां किसानों को ऋण, इनपुट, स्‍टोरेज, प्रोसेसिंग और बाजार तक पहुंच प्रदान करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

देश में कितनी सहकारी समितियां

एक अनुमान के मुताबिक भारतीय सहकारी तंत्र में करीब 8 लाख से ज्‍यादा सहकारी समितियां हैं जो लाखों ग्रामीण परिवारों को फायदा पहुंचाती हैं. कुछ सहकारी समितियों जैसे इफको ने उर्वरक, अमूल ने डेयरी उत्पाद और नैफेड ने कृषि खरीद में उचित मूल्य सुनिश्चित करके और बिचौलियों पर निर्भरता कम करके किसानों को सशक्त बनाया है. सहकारी समितियां सेल्‍फ हेल्‍प ग्रुप (SHG) और माइक्रोफाइनेंस के जरिये से ग्रामीण महिलाओं और छोटे उत्पादकों का भी समर्थन करती हैं. इनकी मदद से किसानों की आय सुधरती है और ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा मिलता है.

इन सफलताओं का देखते हुए सरकार अब सहकारी क्षेत्र को फिर से जिंदा करने की कोशिशों में लग गई है. सरकार ने कई तरह की पहल की हैं जिनमें सबसे अहम है 2,516 करोड़ रुपये के खर्च के साथ ईआरपी-बेस्‍ड राष्‍ट्रीय सॉफ्टवेयर के जरिये 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का कम्प्यूटरीकरण है. पैक्स के परिचालन को बढ़ाया गया है. अब इसमें डेयरी, मत्स्य पालन, स्‍टोरेज, ग्रीन एनर्जी डिस्ट्रिब्‍यूशन और बैंकिंग सर्विसेज जैसी 25 से ज्‍यादा व्यावसायिक गतिविधिया शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त पैक्स को और प्रैक्टिकल बनाने के लिए इसे कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में विकसित किया जा रहा है जो गांव स्तर पर ई-सर्विसेज मुहैया करा रहे हैं. बेहतर नीति निर्माण और उन्‍हें लागू करने के लिए कार्यान्वयन के लिए रिकॉर्ड को अपडेट किया जा रहा है. इसके लिए एक राष्‍ट्रीय सहकारी डेटा बेस को तैयार किया जा रहा है. जबकि सहकारी विकास के लिए एक सक्षम तंत्र बनाने के लिए एक नई राष्‍ट्रीय सहकारी नीति तैयार की जा रही है.

कैसे काम कर रहा सहकारिता संघ

सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में हर पंचायत और गांव में दो लाख नए बहुउद्देश्यीय पैक्स या डेयरी/मत्स्य पालन सहकारी समितियों की स्थापना करना और सहकारी नेटवर्क का विस्तार करना है. सहकारी संघ की तरफ से सरकार के सभी लक्ष्‍यों को पूरा करने के लिए सहकारिता मंत्रालय के साथ सक्रियता बढ़ा दी गई है. सहकारी संघ की तरफ से इस पूरे साल को अंतरराष्‍ट्रीय सहकारिता वर्ष (IYC) 2025 के तौर पर मानाया जा रहा है. इस दौरान संघ राज्य सहकारी विभागों के साथ मिलकर काम करेगा.

सहकारी समितियों के अंदर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सीआईओ और लोकपाल प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए जा रहे हैं. इसमें लीडर्स को को सर्वोत्तम शासन प्रथाओं के बारे में बताया जा रहा है. सहकारी विकास को और अधिक समर्थन देने के लिए एनसीयूआई ने अपना लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) पोर्टल लॉन्च किया जो छात्रों और सहकारी, दोनों को क्षेत्र-विशिष्ट मॉड्यूल तक पहुंच प्रदान करता है जो सहकारी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं. यह पोर्टल नई सहकारी समितियों की स्थापना के लिए गाइडेंस मुहैया करा रहा है.

NCUI IYC-2025 में अग्रणी भूमिका निभा रहा 

सहकारी संघ के अध्यक्ष दिलीप संघानी के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (NCUI) सहकारी क्षेत्र के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सहकारिता मंत्रालय के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है. एनसीयूआई विभिन्न पहलों के जरिए सहकारी मूल्यों को बढ़ावा देने और क्षेत्र को मजबूत करने में सहायक रहा है. यह पोर्टल नई सहकारी समितियों की स्थापना के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है. इन प्रयासों के अलावा एनसीयूआई सहकारी नेताओं और अद्वितीय प्रदर्शन करने वाली समितियों की सफलता की कहानियों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है ताकि इस क्षेत्र में अन्य लोगों को प्रेरित किया जा सके.  इसी के तहत 16 अगस्त 2021 को स्थापित एनसीयूआई हाट एक अद्वितीय सहकारी बाज़ार के रूप में कार्य कर रही है,  यहां पर हथकरघा और हस्तशिल्प सहित देश भर की सहकारी समितियों के उत्पाद एक ही छत के नीचे और स्थान पर बेचे जाते हैं.

सहकारी संघ के प्रेसीडेंट दिलीप संघानी कहते हैं कि एनसीयूआई का कॉप कनेक्ट डिवीजन सभी राज्यों में सहकारिता से जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय सहकारी ओलंपियाड का आयोजन कर रहा है. इसी तरह जीसीपी विभाग भी पूरे देश में जागरूकता सम्मेलन आयोजित कर रहा है. हाल ही में त्रिपुरा में राज्य सरकार के समर्थन से सफल कार्यक्रम किए गए हैं. ये पहल सहकारी आंदोलन को बढ़ाने और देश भर में इसके विकास को सुनिश्चित करने के लिए एनसीयूआई की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. सहकारी क्षेत्र ग्रामीण और शहरी दोनों आर्थिक विकास के लिए एक अहम स्तंभ के रूप में खड़ा है, जो अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाने, महिलाओं को सशक्त बनाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने जैसे कई लाभ प्रदान करता है.

सहकारी क्षेत्र को अधिक समृद्ध बनाने में जुटे

सहकारिता मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के सक्रिय प्रयासों से इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए अहम कदम उठाए जा रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (IYC2025, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, एलएमएस पोर्टल का शुभारंभ और नई सहकारी समितियां बनाने के प्रयासों जैसी पहलों के माध्यम से एक मजबूत, अधिक जीवंत सहकारी तंत्र की नींव रखी जा रही है. एनसीयूआई हाट जैसे प्लेटफार्मों के साथ-साथ राज्य स्तरीय सहकारी ओलंपियाड और जागरूकता सम्मेलनों सहित चल रहे प्रयास भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहकारी समितियों को सबसे आगे लाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. एनसीयूआई और सहकारिता मंत्रालय की ये सभी पहल सहकारी क्षेत्र को और अधिक समावेशी और समृद्ध बनाने के लिए प्रयासरत है.

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Published: 20 Mar, 2025 | 01:28 PM

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