आपके गांव का पानी खारा है तो करें अश्वगंधा की खेती, होगी मोटी कमाई.. बस इन बातों का रखें खयाल

अश्वगंधा सूखे और अर्द्ध‑शुष्क इलाकों में अच्छी तरह उगती है और इसके लिए हल्की दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है, जहां पानी का जमाव न हो. यह फसल 20°C से 35°C तापमान और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बेहतर बढ़ती है.

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नोएडा | Updated On: 6 Jan, 2026 | 02:07 PM

Ashwagandha Cultivation: अगर आपके गांव का भूजल खारा है, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है. अब आप खारे पानी में भी खेती कर सकते हैं. बस इसके लिए आपको खेती करने का तरीका बदलना होगा. साथ ही आपको पारंपरिक फसलों के बजाए औषधीय फसलों की खेती करनी होगी. क्योंकि कई ऐसी औषधीय फसलें हैं, जिनकी खेती खारे पानी में भी की जा सकती है. इन्हीं फसलों में एक है अश्वगंधा. अगर आप अश्वगंधा की खेती करते हैं, तो कम लागत में तगड़ी कमाई होगी, क्योंकि मार्केट में इसकी डिमांड अधिक है. इससे कई सारी आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाई जाती हैं.

दरअसल, अश्वगंधा औषधीय गुणों से भरपूर फसल है. यह कम सिंचाई में आसानी से तैयार हो जाती है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. खास बात यह है कि अश्वगंधा सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त नकदी फसल है. अगर किसान इसकी खेती करते हैं, तो कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. अगर आप राजस्थान के रहने वाले हैं, तो आपके लिए अश्वगंधा की खेती किसी वरदान से कम नहीं है. क्योंकि राजस्थान का मौसम अश्वगंधा की खेती के अनुकूल है. लेकिन इसकी खेती शुरू करने से पहले किसानों को कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना होगा.

बुवाई से पहले इस तरह तैयार करें खेत

अश्वगंधा की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी बहुत जरूरी है. सबसे पहले ट्रैक्टर से गहरी जुताई कर खेत को भुरभुरा बनाएं और उसमें खाद मिलाएं. इसके बाद बीज का उपचार करके बुवाई करें. एक हेक्टेयर में लगभग 7- 8 किलो बीज पर्याप्त होते हैं. बुवाई के तुरंत बाद पहला पानी दें और 5- 7 दिन बाद दूसरा पानी दें. फसल में पहला खरपतवार नियंत्रण 20- 22 दिन और दूसरा 35- 40 दिन की अवस्था में करें.

इतने दिनों में फसल हो जाती है तैयार

अश्वगंधा सूखे और अर्द्धशुष्क इलाकों में अच्छी तरह उगती है और इसके लिए हल्की दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है, जहां पानी का जमाव न हो. यह फसल 20°C से 35°C तापमान और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बेहतर बढ़ती है. अश्वगंधा की खेती खारे पानी में भी की जा सकती है और जैविक खाद व वर्मी कम्पोस्ट देने से मिट्टी की उर्वरता और फसल की गुणवत्ता बढ़ती है. जब पौधों की पत्तियां सूखने लगें और फल लालनारंगी रंग के दिखें, तब फसल पक चुकी मानी जाती है. आमतौर पर बुवाई के 150- 180 दिनों बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके लिए पूरे पौधे को उखाड़कर जड़ें निकालनी चाहिए ताकि अच्छी गुणवत्ता मिल सके.

एक एकड़ में होगी इतनी कमाई

 अगर आप एक एड़क में अश्वगंधा की बुवाई करते हैं, तो 450 किलो जड़े का उत्पादन होगा, जबकि, 50 किलो के करीब बीज पैदा होंगे. अभी मार्केट में अश्वगंधा 200 से 230 रुपये किलो बिक रहा है. इस तरह किसान 450 किलो जड़ें बेचकर कम से कम 90 हजार रुपये की कमाई कर सकते हैं.

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Published: 6 Jan, 2026 | 02:03 PM

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