किसानों के लिए ATM है यह फसल! बुवाई के दो महीने बाद से ही कमाई शुरू.. पूरी गर्मी रहती है मार्केट में मांग
तरबूज की अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई का सही समय बेहद जरूरी है. बुवाई के बाद हर 5 से 7 दिन में खेत में पानी देना चाहिए. वहीं, जब पौधों में फल आने लगें तो 8 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना उचित होता है. इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बेहतर होता है.
Watermelon Farming: सर्दी का मौसम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. मार्च महीना आते-आते गर्मी की शुरुआत हो जाती है. इसके साथ ही मार्केट में तरबूज की मांग बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप तरबूज की खेती करना चाहते हैं, तो अभी आपके पास अच्छा मौका है. अगर आप तरबूज की आज बुवाई करते हैं, तो दो महीने बाद उत्पादन शुरू हो जाएगा. इससे आपको अच्छी कमाई होगी. ऐसे भी गर्मी के मौसम में तरबूज को किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प माना जाता है. लेकिन तरबूज की खेती शुरू करने से पहले किसानों को इसकी बुवाई की विधि के बारे में जानना चाहिए.
तरबूज की खेती के लिए बुवाई का सही समय बेहद अहम है. कई राज्यों में इसकी बुवाई जनवरी में शुरू हो जाती है और मार्च से कटाई होने लगती है. वहीं कुछ क्षेत्रों में फरवरी- मार्च में भी बुवाई की जाती है. पहाड़ी इलाकों में तरबूज की बुवाई के लिए मार्च से अप्रैल का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. बुवाई के 2 से 3 महीने के भीतर फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी मुनाफा मिलता है.
ये हैं तरबूज की उन्नत किस्में
तरबूज की अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त धूप और अच्छी जल निकासी वाली जमीन का होना जरूरी है. इस फसल के लिए काली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7 के बीच होना चाहिए. तापमान की बात करें तो 24 से 27 डिग्री सेल्सियस तरबूज की खेती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. ऐसे जल्दी फल देने वाली किस्मों में पूसा बेदाना, अर्क ज्योति और शुगर बेबी प्रमुख हैं. इन किस्मों के फल कम समय में तैयार हो जाते हैं और इनकी खेती भी आसान होती है.
इतने दिन पर करें सिंचाई
तरबूज की अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई का सही समय बेहद जरूरी है. बुवाई के बाद हर 5 से 7 दिन में खेत में पानी देना चाहिए. वहीं, जब पौधों में फल आने लगें तो 8 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना उचित होता है. इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बेहतर होता है. साथ ही तरबूज की अच्छी पैदावार के लिए फसल को कीट और रोगों से सुरक्षित रखना जरूरी है. इसके लिए खेत का समय-समय पर निरीक्षण करें, ताकि कीट या बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो सके और समय रहते नियंत्रण किया जा सके. यानी कम लागत में होने वाली यह खेती गर्मियों में ज्यादा मांग के कारण किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है. कई किसान सिर्फ एक बीघा जमीन से 40 से 50 हजार रुपये तक का मुनाफा महज 2 से 3 महीने में कमा लेते हैं, जिससे तरबूज की खेती एक लाभकारी विकल्प बन जाती है.