31 जनवरी से पहले तरबूज की इन किस्मों की करें बुवाई, अप्रैल से कमाई शुरू.. 5 किलो का होगा फल

अप्रैल में तरबूज-खरबूज के अच्छे दाम पाने के लिए जनवरी में अगेती बुवाई जरूरी है. बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद, जैविक खाद और ट्राइकोडर्मा मिलाना चाहिए. इसके बाद दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाएं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Jan, 2026 | 01:38 PM

Watermelon Farming: अप्रैल महीने से मार्केट में तरबूज और खरबूज की बिक्री शुरू हो जाएगी. शुरुआत में रेट भी ज्यादा होता है. ऐसे में तरबूज की खेती करने वाले किसानों की अच्छी कमाई होगी. लेकिन किसानों को मालूम होना चाहिए कि तरबूज से बंपर कमाई करनी है तो इसके लिए जनवरी में ही अगेती किस्मों की बुवाई करनी होगी. इसके लिए उन्नत किस्मों का चुनाव करना होगा. तो आइए आज जानते हैं, तरबूज की उन्नत किस्में और खेती करने का सही तरीका क्या है?

दरअसल, अगेती तरबूज की बुवाई दिसंबर-जनवरी महीने में की जाती है. अगर किसान जनवरी में बुवाई करते हैं, तो दो महीने में फसल तैयार हो जाएगी. यानी अप्रैल से उत्पादन शुरू हो जाएगा. इसलिए तरबूज की बुवाई करने की प्लानिंग कर रहे किसानों के लिए अभी अच्छा मौका है. ऐसे भी एक्सपर्ट का कहना है कि मार्च-अप्रैल में बाजार में तरबूज की आवक  कम और मांग ज्यादा होती है, इसलिए किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं. लेकिन बुवाई करने से पहले किसानों को अच्छी तरह से खेत को तैयार करना चाहिए.

कितना होना चाहिए मिट्टी का पीएच स्तर

अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी जरूरी है. बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद, जैविक खाद और ट्राइकोडर्मा मिलाना चाहिए. इसके बाद दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाएं, जिससे मिट्टी की उर्वरता  बढ़ती है और फसल का उत्पादन बेहतर होता है. तरबूज की खेती के लिए बलुई-दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है और मिट्टी का पीएच 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए. खेत में सही जल निकास बेहद जरूरी है, क्योंकि पानी भरने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और फसल को नुकसान होता है. इसलिए किसानों को मेड़ बनाकर उन्हीं पर बीज बोना चाहिए, ताकि अधिक पानी होने पर भी पौधे सुरक्षित रहें.

बुवाई से पहले इस खाद का करें इस्तेमाल

ऐसे तरबूज की बुवाई दो तरीकों से की जाती है. पहली विधि में सीधे खेत में बीज बोए जाते हैं, लेकिन इसमें निराई-गुड़ाई पर ज्यादा खर्च आता है. दूसरी विधि मल्चिंग की है, जिसमें पानी कम लगता है, खरपतवार नहीं उगते और तरबूज साफ-सुथरे व बेहतर स्वाद वाले होते हैं. कृषि जानकारों का कहना है कि अगेती तरबूज की खेती में जुताई के समय ही गोबर की खाद, जैविक खाद और ट्राइकोडर्मा को मिट्टी में मिला देना चाहिए. इससे फसल में बीमारियों का खतरा  कम होता है. उन्होंने कहा कि बुवाई हमेशा मेड़ों पर करें, ताकि पानी भरने पर पौधे न सड़ें. अगेती बुवाई से तरबूज जल्दी बाजार पहुंचता है और किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है.

ये हैं तरबूज की उन्नत किस्में

अगर अगेती तरबूज की खेती की बात करें तो इसके लिए सिजेंटा सिंभा, सागर किंग और सेमिनिस बाहुबली जैसी हाइब्रिड किस्में बहुत अच्छी मानी जाती हैं. ये किस्में जल्दी बढ़ती हैं और लगभग 60- 70 दिनों में तैयार हो जाती हैं. इनके फल दिखने में आकर्षक होते हैं, जिनका वजन करीब 2 से 5 किलो तक होता है. इनमें मिठास भी अच्छी होती है, जिसका TSS स्तर 11-13 फीसदी तक रहता है. दिसंबर- जनवरी में बुवाई करने के लिए ये किस्में खास तौर पर उपयुक्त हैं.

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Published: 28 Jan, 2026 | 01:35 PM

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