प्राकृतिक खेती ने बढ़ाई 2.60 लाख किसानों की कमाई, सूखा झेल रहे बुंदेलखंड में 470 क्लस्टर से बदली स्थिति  

Natural Farming in uttar pradesh: ‘प्राकृतिक खेती मिशन’ के जरिए खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है. रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के जाल से निकलकर अब किसान देसी संसाधनों के सहारे खेती कर रहे हैं और यही बदलाव उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है. यूपी में प्राकृतिक खेती का रकबा और किसानों की संख्या में इजाफा हुआ है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 29 Apr, 2026 | 03:49 PM

उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को तेजी से बढ़ावा दिए जाने से राज्य के 2.60 लाख किसानों की कमाई में इजाफा हुआ है. राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में कहा गया है कि प्राकृतिक खेती योजनाओं के तहत 75 जिलों में 2356 क्लस्टर में 1.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इसके साथ ही गो आधारित प्राकृतिक खेती योजना के तहत बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जनपदों में 470 प्राकृतिक क्लस्टर चलाए जा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में खेती अब सिर्फ गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला व्यवसाय बनती जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘प्राकृतिक खेती मिशन’ के जरिए खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है. रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के जाल से निकलकर अब किसान देसी संसाधनों के सहारे खेती कर रहे हैं और यही बदलाव उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है.

यूपी में प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ा

प्रदेश में इस समय 75 जिलों में 2356 क्लस्टर के जरिए 1.14 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में आ चुका है. इसका सीधा फायदा 2.60 लाख किसानों को मिल रहा है. खास बात यह है कि यह खेती सिर्फ उत्पादन का तरीका नहीं बदल रही, बल्कि किसानों के खर्च को कम करके उनकी आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी खोल रही है.

बुंदेलखंड बना अभियान का मजबूत चेहरा

प्राकृतिक खेती अभियान का मजबूत चेहरा बुंदेलखंड बनकर उभरा है. झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जैसे जिलों में ‘गो-आधारित प्राकृतिक खेती’ ने नई उम्मीद जगाई है. बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 23 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली इस पहल ने पहले के समय सूखा और संसाधनों की कमी से जूझ रहे इलाके को एक नए मॉडल में बदल दिया है. इसका लाभ 22 हजार किसानों को मिला. गो आधारित जीवामृत और घनजीवामृत के इस्तेमाल से खेती की लागत तेजी से घटी है, वहीं फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई है.

किसानों को कम खर्च में मिल रहा बेहतर उत्पादन

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि बुंदेलखंड में शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन रहा है. किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल रहा है और बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की मांग उन्हें अतिरिक्त लाभ दे रही है. किसानों की जेब पर बोझ घटाकर उनकी आमदनी बढ़ाना और लोगों को रसायनमुक्त भोजन उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है.

केमिकल की जगह गो-आधारित खेती

खेतों में केमिकल की जगह गो-आधारित फसलों से किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं. गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि योगी सरकार का यह प्रयोग न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि प्रदेश को सुरक्षित और स्वास्थ्यकर खाद्यान्न की दिशा में भी आगे बढ़ा रहा है.

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