धान खरीद घोटाले में ट्रांसपोर्टरों ने किसी भी तरह की भूमिका से किया इनकार, अब जांच का बढ़ा दायरा

हरियाणा की धान मंडियों में ‘घोस्ट ट्रक’ स्कैम में फर्जी गेट पास और J-फॉर्म की शिकायतें सामने आई हैं. ट्रांसपोर्टरों ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है. जांच में फर्जी रिकॉर्ड, स्टॉक कमी और घटिया क्वालिटी का चावल बरामद हुआ. उच्च अधिकारियों से विस्तृत जांच की मांग की गई है.

नोएडा | Published: 3 Jan, 2026 | 08:14 AM

Haryana News: हरियाणा में धान मंडियों से चावल मिलों तक धान की कथित हेराफेरी में इस्तेमाल हुए ‘घोस्ट ट्रकों’ के खुलासे के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है. ट्रांसपोर्टरों ने इसमें किसी भी तरह की भूमिका से इनकार करते हुए कहा है कि उनके ट्रकों के नंबरों का गलत इस्तेमाल कर फर्जी ट्रांसपोर्ट एंट्री बनाई गईं. पूर्व करनाल एसपी गंगा राम पुनिया की अगुवाई वाली एसआईटी की जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड में 118 ट्रकों को धान ढोते हुए दिखाया गया, जबकि हकीकत में ये ट्रक किसी और जगह मौजूद थे. करनाल, कुंजपुरा और असंध की मंडियों में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिन ट्रांसपोर्टरों के वाहन नंबर संदिग्ध एंट्री में पाए गए, उन्होंने कहा कि वे यात्राएं कभी हुई ही नहीं.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि न तो उन्होंने धान ढोया और न ही सरकार से कोई भुगतान लिया. उनका कहना है कि सभी वाहन रिकॉर्ड मंडी बोर्ड, खरीद एजेंसियों और राइस मिलों के पास मौजूद हैं. उन्होंने जांच में पूरा सहयोग और जरूरत पड़ने पर अपने वाहनों का जीपीएस डेटा देने की बात कही, साथ ही आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में उनके वाहन नंबरों का दुरुपयोग किया गया है.

वाहन नंबर पर एग्जिट गेट पास बनाए गए

सिस्टम में खामियों की ओर इशारा करते हुए एक ट्रांसपोर्टर ने कहा कि जब उनके वाहन नंबर पर एग्जिट गेट पास बनाए गए, तब उन्हें मोबाइल पर कोई मैसेज ही नहीं मिला. एक अन्य ट्रांसपोर्टर ने कहा कि कई बार जीपीएस ट्रैकर ठीक से काम नहीं करते, जिससे भ्रम की स्थिति बन सकती है. हालांकि उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि जांच के नाम पर ट्रांसपोर्टरों को परेशान न किया जाए. उनका कहना था कि जिन ट्रिप्स को उन्होंने किया ही नहीं, उनके लिए उन्होंने कोई भुगतान भी नहीं लिया है.

राइस मिलों में स्टॉक की कमी पाई गई

अब तक करनाल पुलिस ने 2025-26 के धान खरीद सीजन में छह एफआईआर दर्ज  की हैं, जबकि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 2022-23 सीजन से जुड़े एक मामले में अलग से एफआईआर दर्ज की है. जांच में सामने आया है कि बाहरी आईपी एड्रेस से फर्जी गेट पास बनाए गए, राइस मिलों में स्टॉक की कमी पाई गई, कागजों में धान दिखाया गया लेकिन असल में वह पहुंचा ही नहीं, और बिना रिकॉर्ड व घटिया क्वालिटी का चावल भी बरामद हुआ. 2022-23 के मामले में तो बाइक और कार के नंबरों पर भी धान ढोने की एंट्री दिखाई गई थी. अब तक छह कर्मचारी, मिलर और आढ़ती गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

फर्जी J-फॉर्म जारी किए गए

वहीं, कुंजपुरा धान मंडी में कथित गड़बड़ियों के एक और मामले में उच्च अधिकारियों के पास नई शिकायत दर्ज कराई गई है. इसमें आरोप है कि फर्जी गेट पास बनाए गए और ऐसे वाहन दिखाए गए जिन्होंने मंडी से राइस मिल  तक धान ही नहीं पहुंचाया. खिराजपुर के विकास शर्मा ने अपनी शिकायत में कहा कि फर्जी गेट पास के खिलाफ फर्जी J-फॉर्म जारी किए गए. उनका दावा है कि कुल 54 गेट पास बनाए गए, जबकि 20 वाहन मंडी से राइस मिल तक कभी नहीं गए और उनके GPS लोकेशन जीरो रिकॉर्ड हुए. उन्होंने HAFED, DM और CM विंडो में शिकायत कर विस्तृत जांच की मांग की है.

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