2.56 करोड़ के धान घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई, 7 लोगों पर केस दर्ज.. इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा
हरियाणा के कर्नाल की घरौंडा मंडी में 2.56 करोड़ रुपये के धान खरीद घोटाले का खुलासा हुआ है. ACB ने सात लोगों पर केस दर्ज किया है. जांच में फर्जी वाहनों से धान ढुलाई, कस्टम मिलिंग और सप्लाई दिखाकर सरकारी सिस्टम से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी सामने आई है.
Haryana Paddy Purchase: हरियाणा के कर्नाल स्थित घरौंडा मार्केट कमेटी में साल 2022-23 के दौरान हुए करीब 2.56 करोड़ रुपये के धान खरीद घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इनमें उस समय के मार्केट कमेटी सचिव भी शामिल हैं. यह केस सरकार के निर्देश पर की गई जांच के बाद दर्ज किया गया है, हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. जांच में सामने आया कि घरौंडा अनाज मंडी से धान को कस्टम मिलिंग के लिए चावल मिलों तक ले जाने के नाम पर फर्जी वाहन एंट्री की गई. ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल और वाहन रजिस्ट्रेशन की जांच में पता चला कि कई बार बाइक, स्कूटी और यहां तक कि एक ऑल्टो कार को धान ढोने वाला वाहन दिखाया गया. जबकि ये वाहन धान ले जाने में सक्षम ही नहीं थे. इसके बावजूद इनके नाम से आउट-गेट पास बनाए गए और कागजों में धान की ढुलाई दिखा दी गई.
इस मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें नरेश मान (तत्कालीन मार्केट कमेटी सचिव), संदीप कुमार (तत्कालीन इंस्पेक्टर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग), M/s सुखदेव एंड कंपनी के मालिक, ऋद्धि-सिद्धि ओवरसीज, गिरिराज ओवरसीज राइस मिल, नंदलाल ओवरसीज राइस मिल और घरौंडा स्थित लक्ष्मी राइस मिल के मालिक शामिल हैं.
इन धराओं में दर्ज हुआ केस
ACB के इंस्पेक्टर दीपक कुमार के अनुसार, आरोपियों पर IPC की धारा 120B, 409, 420, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया गया है, मामले की आगे जांच जारी है. जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड से भी पुष्टि हुई है कि कस्टम मिलिंग के लिए धान की ढुलाई इन्हीं फर्जी वाहनों के जरिए दिखाई गई थी. इससे साफ होता है कि धान खरीद प्रक्रिया में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम का दुरुपयोग किया गया.
इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा
जांच में पता चला कि खरीद सीजन के दौरान घरौंडा अनाज मंडी में कुल 17,88,087.68 क्विंटल धान की खरीद दिखाई गई. इसमें से 10,63,864.50 क्विंटल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जरिए, 2,70,293.56 क्विंटल हैफेड (HAFED) के जरिए और 4,53,929.62 क्विंटल हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (HSWC) के जरिए खरीदा जाना दिखाया गया. हालांकि, रिकॉर्ड में कुल 11,628.38 क्विंटल धान की ढुलाई कागजों पर दिखाई गई.
नियमों के अनुसार, कस्टम मिलिंग के बाद 67 प्रतिशत चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को देना अनिवार्य था. सरकारी रिकॉर्ड में मिलिंग और चावल की सप्लाई पूरी दिखाई गई, लेकिन जांच में सामने आया कि जिन वाहनों से धान ढोने की एंट्री की गई थी, वे कभी इस्तेमाल ही नहीं हुए. इससे साफ हो गया कि पूरी प्रक्रिया फर्जी थी.
वाहनों से कभी धान की ढुलाई नहीं हुई
पुलिस ने एसडीएम कार्यालय और वाहन रजिस्ट्रेशन विभाग से जानकारी जुटाई. इसके बाद फरीदपुर, थसका मोरा (कुरुक्षेत्र) और कलराम के असली वाहन मालिकों के बयान लिए गए. सभी ने बताया कि उनके वाहनों से कभी धान की ढुलाई नहीं हुई और उन्हें इसके बदले कोई भुगतान भी नहीं मिला. एफआईआर के मुताबिक, पुलिस ने पाया कि सभी आरोपी आपस में मिलीभगत करके फर्जी ढुलाई, फर्जी मिलिंग और फर्जी सप्लाई दिखाकर सरकार को धोखा दे रहे थे.