फरवरी में औसत से ज्यादा तापमान रहने की संभावना, गेहूं सहित 10 से अधिक फसलों को नुकसान! अलर्ट जारी

तेलहन और दलहन फसलें जैसे सरसों, चना, मसूर और मटर जल्दी फूल सकती हैं और समय से पहले पक सकती हैं, जिससे फल और बीज छोटे रहेंगे और उत्पादन घटेगा. वहीं, अधिक तापमान प्याज और लहसुन  में बल्किंग रोक सकता है, आलू में कंद का आकार छोटा कर सकता है.

नोएडा | Updated On: 1 Feb, 2026 | 09:58 AM

Crop Damage: फरवरी महीने की शुरुआत के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. इससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. खास कर तापमान में बढ़ोतरी गेहूं सहित 10 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि राजस्थान को छोड़कर उत्तर-पश्चिमी राज्यों में फरवरी में सामान्य से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है. हालांकि राज्यवार तापमान का विस्तृत पूर्वानुमान नहीं बताया गया है, लेकिन अधिक गर्मी से रबी मौसम की मुख्य फसल गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाल स्थित भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के पूर्व निदेशक ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि गेहूं के लिए फरवरी में आदर्श तापमान रात में 12°C और दिन में 25°C होता है. यदि दिन का तापमान 30°C तक बढ़े और एक सप्ताह से अधिक समय तक नहीं रहे, तो पैदावार  पर कोई खतरा नहीं है. खतरा तब है जब दिन और रात दोनों का तापमान अधिक रहे और एक सप्ताह से लंबा समय तक बनी रहे, जो सामान्यतः नहीं होता.

334.17 लाख हेक्टेयर में गेहूं बुवाई

सरकार ने 2025-26 के लिए गेहूं की उत्पादन लक्ष्य 119 मिलियन टन तय किया है, जो अप्रैल में कटाई के लिए तैयार होगा. इस साल कुल गेहूं की बुवाई  क्षेत्रफल 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था, यानी 2 फीसदी की वृद्धि हुई. 2024-25 में उत्पादन रिकॉर्ड 117.54 मिलियन टन रहा. IMD ने चेताया है कि फरवरी में सामान्य से ज्यादा तापमान रबी फसलों की वृद्धि को तेज कर सकता है और फसल की अवधि को कम कर सकता है, खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में. गेहूं और जौ जैसी फसलें जल्दी पक सकती हैं, जिससे दाने ठीक से विकसित नहीं होंगे और पैदावार कम हो सकती है.

चना, मसूर और मटर को पहुंचेगा नुकसान

तेलहन और दलहन फसलें जैसे सरसों, चना, मसूर और मटर जल्दी फूल सकती हैं और समय से पहले पक सकती हैं, जिससे फल और बीज छोटे रहेंगे और उत्पादन घटेगा. गर्म मौसम की वजह से एफिड और अन्य सकने वाले कीट तेजी से फैल सकते हैं. सब्जियों जैसे आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर, फूलगोभी, पत्ता गोभी और मटर की फसल भी प्रभावित हो सकती है.

प्याज और लहसुन में बल्किंग पर पड़ेगा असर

अधिक तापमान प्याज और लहसुन  में बल्किंग रोक सकता है, आलू में कंद का आकार छोटा कर सकता है, टमाटर के फूल झड़ सकते हैं और फूलगोभी-पत्ता गोभी की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे पैदावार और बाजार मूल्य दोनों घट सकते हैं.  इसी तरह, आम, खट्टे फल, केला और अंगूर जैसी बागवानी फसलों में जल्दी फूलना, असमान फल लगना और फल झड़ना हो सकता है. सेब, नाशपाती और पीच जैसी ठंडी जलवायु वाली फसलों में भी अनियमित फूलना और खराब फल विकास देखा जा सकता है.

Published: 1 Feb, 2026 | 09:56 AM

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