गेहूं में बालियां आते ही करें ये खास उपाय, दाना होगा मोटा और पैदावार मिलेगी बंपर

गेहूं की फसल में बालियां आने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस अवस्था में सही सिंचाई और पोषक तत्वों का छिड़काव करने से दाने का आकार, चमक और वजन बढ़ता है. कम लागत में अपनाए गए ये आसान उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा दिला सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 26 Jan, 2026 | 11:04 AM

Wheat Farming : खेत में जब गेहूं की फसल बालियों से भरने लगती है, तब किसान की मेहनत असली परीक्षा में होती है. यही वह समय होता है, जब सही देखभाल और पोषण मिलने पर गेहूं का दाना चमकदार, मोटा और भरपूर बनता है. अगर इस अहम अवस्था में थोड़ी सी समझदारी दिखाई जाए, तो पैदावार में बड़ा फर्क साफ नजर आता है.

बालियां आने का समय क्यों है सबसे अहम

नवंबर के शुरुआती दिनों में बोई गई गेहूं की फसल आमतौर पर 80 से 90 दिन की उम्र में पहुंच जाती है. इस समय फसल में बालियां निकलने लगती हैं और दाना दूध अवस्था में होता है. यही वह दौर है, जब फसल को अतिरिक्त पोषण  की जरूरत होती है. अगर इस समय सिंचाई में कमी हो या पोषक तत्व न मिलें, तो दाना कमजोर रह जाता है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. इसलिए किसानों को इस स्टेज पर फसल की खास निगरानी करनी चाहिए.

पानी और पोषण दोनों पर दें बराबर ध्यान

इस अवस्था में सबसे जरूरी है कि खेत में नमी की कमी न हो. समय पर सिंचाई करना बेहद जरूरी है ताकि पौधे पोषक तत्वों को सही तरीके से कर सकें. इसके साथ ही सिर्फ यूरिया या डीएपी  पर निर्भर रहना काफी नहीं होता. क्योंकि जब फसल में बालियां और दाना बनने लगता है, तब उसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की जरूरत होती है, जो सामान्य खाद से पूरी नहीं हो पाती.

छिड़काव का आसान और असरदार तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल में बालियां निकलते समय एनपीके 0:52:34 और बोरान का छिड़काव करना बेहद लाभकारी माना जाता है. इस अवस्था में पौधों को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है, जिसे यह घोल पूरा करता है. छिड़काव के लिए प्रति एकड़ लगभग 1 किलो एनपीके 0:52:34 और 100 ग्राम बोरान को करीब 150 लीटर पानी में अच्छी तरह घोल लेना चाहिए. इसके बाद स्प्रे पंप की मदद से पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव करें. इस उपाय से गेहूं के दाने  मजबूत बनते हैं, उनमें चमक आती है और भराव बेहतर होता है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है.

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

इस छिड़काव पर प्रति एकड़ करीब 200 से 250 रुपये तक का खर्च आता है, जो किसानों के लिए किफायती माना जाता है. बाजार में अलग-अलग कंपनियों के माइक्रोन्यूट्रिएंट आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती. इस कम लागत वाले उपाय को अपनाने से गेहूं के उत्पादन  में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है. छिड़काव से दाने का भराव बेहतर होता है, दाना मोटा और चमकदार बनता है. क्वालिटी सुधरने से गेहूं को बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे किसानों की कुल आमदनी में सीधा फायदा होता है.

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