काशी मोहिनी और काशी पीतांबर हैं तरबूज की बेहतरीन किस्म, 75 दिन में फसल तैयार.. 60 टन तक पैदावार
उन्नत तरबूज किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता बेहतर है और इनमें उत्पादन भी ज्यादा मिलता है. सही देखभाल के साथ प्रति हेक्टेयर 40 से 60 टन तक पैदावार संभव है. जनवरी में बुवाई करने से फसल मार्च- अप्रैल में तैयार हो जाती है.
Watermelon Farming: अगर आपतरबूज की खेती करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत ही जरूरी है. क्योंकि आज हम तरबूज की कुछ खास किस्मों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित किया गया है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ये किस्में जनवरी महीने में बुवाई के लिए बहुत ही उपयुक्त है. यह कम समय में तैयार हो जाएंगी और इसकी पैदावार भी सामान्य किस्मों के मुकाबले बेहतर है.
दरअसल, हम जिस तरबूज की किस्म के बारे में बात करने जा रहे हैं उनके नाम काशी मोहिनी और काशी पीतांबर हैं. कहा जा रहा है कि इन दोनों उन्नत किस्मों से तरबूज की खेती पहले से ज्यादा फायदेमंद हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक जनवरी से बुवाई शुरू हो जाती है और सही किस्म चुनने पर कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिल सकता है. ICAR के तहत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) ने काशी मोहिनी और काशी पीतांबर जैसी उन्नत किस्में विकसित की हैं. काशी मोहिनी 75-80 दिनों में तैयार हो जाती है, इसका गूदा गहरा लाल और बहुत मीठा होता है, जिससे बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है और किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं.
40 से 60 टन तक पैदावार संभव
कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि उन्नत तरबूज किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता बेहतर है और इनमें उत्पादन भी ज्यादा मिलता है. सही देखभाल के साथ प्रति हेक्टेयर 40 से 60 टन तक पैदावार संभव है. जनवरी में बुवाई करने से फसल मार्च- अप्रैल में तैयार हो जाती है. ऐसे भी इस समय बाजार में तरबूज की मांग तेज होती है. ऐसे में किसानों को अच्छे दाम मिल सकते हैं.
प्रमाणित बीज का ही इस्तेमाल करें किसान
खास बात यह है कि इन दोनों किस्मों की बुवाई करने वाले किसानों को प्रमाणित बीज का ही इस्तेमाल करना चाहिए. अगर किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और संतुलित खाद-उर्वरक अपनाते हैं तो ज्यादा पैदावार होगी. यानी अगर किसान काशी मोहिनी और काशी पीतांबर की खेती सही तकनीक से करते हैं तो उनके लिए इस बार काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.
काशी मोहिनी और काशी पीतांबर की खासियत
अगर काशी मोहिनी और काशी पीतांबर की खासियत के बारे में बात करें तो इसका स्वाद ज्यादा मिठा होता है. ये दोनों किस्में ज्यादा उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. जनवरी में बुवाई करने पर फसल मार्च-अप्रैल तक तैयार हो जाती है. इनमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. यानी रोग लगने का डर भी कम रहता है. यानी किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.