सिर्फ 70 दिन में खेत से निकलेगा नोटों का ढेर! किसानों के लिए ये खेती बन गई ATM

खेती किसानों के लिए कम समय में ज्यादा कमाई का जरिया बन रही है. 60 से 70 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल बेहतर मिठास और गुणवत्ता के कारण बाजार में अच्छे दाम दिला रही है, जिससे किसान एक सीजन में लाखों की आमदनी कर रहे हैं.

नोएडा | Published: 26 Jan, 2026 | 04:29 PM

Watermelon Farming : खेती में अगर कम समय में ज्यादा कमाई हो जाए, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है. आज के दौर में कई किसान ऐसी फसल की तलाश में रहते हैं, जो जल्दी तैयार हो, बाजार में जिसकी मांग हो और जिससे मोटा मुनाफा मिले. तरबूज की खेती इन सभी कसौटियों पर खरी उतरती दिख रही है. खासकर इसकी कुछ उन्नत किस्में किसानों की आमदनी को नई उड़ान दे रही हैं.

क्यों खास है तरबूज की उन्नत खेती

तरबूज की खेती  के लिए फरवरी और मार्च का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान लगाए गए पौधे 60 से 70 दिनों में फल देना शुरू कर देते हैं. यही वजह है कि किसान कम समय में फसल काटकर बाजार तक पहुंचा सकते हैं. तरबूज की उन्नत किस्मों में मिठास ज्यादा होती है, रंग आकर्षक होता है और वजन भी अच्छा मिलता है. इन्हीं खूबियों के कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है.

जन्नत, सरस्वती जैसी किस्में दे रहीं बंपर पैदावार

आजकल जन्नत, सरस्वती, विशाला और आरोही जैसी उन्नत किस्मों की खेती तेजी से बढ़ रही है. इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत है इनका ज्यादा उत्पादन और बेहतर क्वालिटी. इन किस्मों से प्रति एकड़ 25 से 30 टन तक तरबूज की पैदावार  मिल सकती है. साथ ही इनका स्वाद ज्यादा मीठा होता है, जिससे बाजार में प्रति किलो 4 से 5 रुपये तक अधिक दाम मिलने की संभावना रहती है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए एक सीजन में अच्छी कमाई का मजबूत जरिया बन रही है.

लागत कम, कमाई ज्यादा

तरबूज की उन्नत किस्मों की खेती  में प्रति एकड़ लगभग 70 से 80 हजार रुपये तक की लागत आती है. इसमें बीज, खाद, सिंचाई और देखभाल का खर्च शामिल होता है. अगर फसल की सही तरीके से देखभाल की जाए, तो एक सीजन में प्रति एकड़ 3 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत संभव है. यही वजह है कि किसान इसे खेती का एटीएम भी कहने लगे हैं. ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग अपनाने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो जाती हैं.

ऐसे करें खेत की सही तैयारी

तरबूज की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें. खेत में गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता  बढ़ती है. तरबूज के बीज मेड़ों पर बोए जाते हैं, ताकि पानी का सही निकास हो सके. फसल के बढ़ते समय नियमित सिंचाई जरूरी है, लेकिन ध्यान रखें कि मेड़ों पर ज्यादा पानी न भरे. जब फल लगने लगें, तब सिंचाई पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है.

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