जनवरी की खेती से होगी पैसों की बारिश, बस किसान इन फल-सब्जियों के बीज लगा लें

जनवरी में सब्जियों की खेती से पहले खेत की तैयारी सबसे अहम होती है. ठंड के कारण मिट्टी सख्त हो जाती है, इसलिए अच्छी जुताई और पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी होता है. देसी खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिट्टी में मिलाने से उसकी ताकत बढ़ती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 5 Jan, 2026 | 10:30 AM

Farming Tips: नया साल आते ही किसान के मन में भी नई उम्मीदें जन्म लेती हैं. जनवरी का महीना केवल ठंड और कोहरे का नहीं होता, बल्कि यह खेती के लिहाज से बेहद अहम समय भी है. अगर इस समय खेत खाली पड़े हैं और किसान सही योजना के साथ सब्जियों की खेती शुरू कर दें, तो आने वाले महीनों में यही खेत लाखों रुपये की आमदनी का जरिया बन सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि जनवरी में बोई गई सब्जियां गर्मियों की शुरुआत में बाजार में आती हैं, जब मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होती है. यही वजह है कि इस महीने की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है.

खेती की सही तैयारी से तय होती है कमाई

जनवरी में सब्जियों की खेती से पहले खेत की तैयारी सबसे अहम होती है. ठंड के कारण मिट्टी सख्त हो जाती है, इसलिए अच्छी जुताई और पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी होता है. देसी खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिट्टी में मिलाने से उसकी ताकत बढ़ती है. इसके साथ संतुलित मात्रा में रासायनिक खाद देने से पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है. उत्तर भारत के ठंडे इलाकों में पाले का खतरा बना रहता है, इसलिए फसलों को बचाने के लिए टनल तकनीक या प्लास्टिक कवर का सहारा लिया जा सकता है. इससे पौधे सुरक्षित रहते हैं और उनकी बढ़त भी तेज होती है.

भिंडी, मिर्च और शिमला मिर्च से शुरू करें मुनाफे की कहानी

जनवरी के आखिर में बोई गई भिंडी किसानों को सबसे पहले कमाई देती है. शुरुआती भिंडी बाजार में ऊंचे दामों पर बिकती है और सही देखभाल के साथ यह फसल कुछ ही महीनों में अच्छा रिटर्न देती है. इसी तरह शिमला मिर्च और हरी मिर्च की खेती भी जनवरी में काफी फायदेमंद मानी जाती है. मिर्च की खास बात यह है कि इसकी तुड़ाई लंबी अवधि तक चलती है, जिससे किसान को बार-बार बाजार जाने का मौका मिलता है और नियमित आमदनी बनी रहती है.

बेल वाली सब्जियों से बढ़ाएं खेत की कीमत

खीरा, लौकी, तोरई और गिलकी जैसी बेल वाली सब्जियां जनवरी में बोने पर शानदार नतीजे देती हैं. मल्चिंग और बेड विधि से इन फसलों की पैदावार बढ़ जाती है और खरपतवार की समस्या भी कम होती है. गर्मियों की शुरुआत में जब इन सब्जियों की मांग बढ़ती है, तब किसान को अच्छे भाव मिलते हैं. थोड़ी सी मेहनत और सही तकनीक अपनाकर ये फसलें खेत की तस्वीर बदल सकती हैं.

तरबूज, खरबूजा और टमाटर से गर्मियों की तैयारी

जनवरी में तरबूज और खरबूजे की बुवाई करने से फसल समय पर तैयार होती है और गर्मियों में बाजार में पहुंच जाती है. खासतौर पर त्योहारों और रोजे के समय इन फलों की मांग काफी बढ़ जाती है. वहीं टमाटर की खेती भी इस महीने में शुरू की जा सकती है. अगर मौसम और बाजार का साथ मिल जाए, तो टमाटर कई बार किसानों को उम्मीद से ज्यादा मुनाफा दे देता है. फूलगोभी जैसी सब्जी भी कम लागत में अच्छी पैदावार देने वाली फसल है, जिसे जनवरी में लगाया जा सकता है.

प्याज और आधुनिक तकनीक से भविष्य सुरक्षित

प्याज की अगेती खेती जनवरी में करने से किसानों को आगे चलकर बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में प्याज का रकबा घटने से इसके भाव सुधर सकते हैं. इसके साथ ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने से पानी की बचत होती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. रोग और कीट नियंत्रण पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो नुकसान से बचा जा सकता है.

सही योजना से जनवरी बने खुशहाली का महीना

जनवरी का महीना सब्जी उत्पादक किसानों के लिए नई शुरुआत का संकेत देता है. सही फसल का चुनाव, समय पर बुवाई, आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ—इन चार बातों का ध्यान रखकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं. यह महीना सिर्फ ठंड से लड़ने का नहीं, बल्कि मेहनत और समझदारी से खेती को मुनाफे का सौदा बनाने का भी है.

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