दोपहर को सरसों के खेत में जिंक, पोटाश का करें छिड़काव.. बड़े-बड़े होंगे दाने.. खूब निकलेगा तेल
किसान को ध्यान रखना चाहिए कि फूल आने के समय किसी भी माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव न करें. ऐसा करने से फूल टूटकर गिर सकते हैं और फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. सरसों की फसल में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे जिंक, पोटाश, बोरोन, सल्फर और कॉपर का इस्तेमाल समय पर ही करें.
Mustard cultivation: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों में किसान बड़े स्तर पर सरसों की खेती करते हैं. इससे किसानों की अच्छी कमाई होती है. लेकिन कई किसानों का कहना है कि सरसों से उचित मात्रा में तेल नहीं निकलता है. ऐसे में कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है. लेकिन अब ऐसे किसानों की चिंता करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि आज हम सरसों की खेती करने वाले किसानों को कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाते ही सरसों के दाने बड़े-बड़े हो जाएंगे. इससे पैदावार में बढ़ोतरी होगी और तेल का उत्पादन भी बढ़ जाएगा.
कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि सरसों के खेत में कुछ माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे जिंक, पोटाश, बोरोन, सल्फर और कॉपर बहुत जरूरी होते हैं. अगर इनकी मात्रा खेत में कम होगी, तो फसल तो उग जाएगी, लेकिन तेल कम निकलगा. इसलिए किसान को चाहिए कि ये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स समय पर अपने खेत में इस्तेमाल करें, ताकि फसल और तेल दोनों का उत्पादन बेहतर हो.
इस वजह से उत्पादन होता है प्रभावित
किसान को ध्यान रखना चाहिए कि फूल आने के समय किसी भी माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव न करें. ऐसा करने से फूल टूटकर गिर सकते हैं और फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. सरसों की फसल में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे जिंक, पोटाश, बोरोन, सल्फर और कॉपर का इस्तेमाल समय पर ही करें, यानी जब फूल पूरी तरह न आए हों. सही समय पर और सही मात्रा में इनका प्रयोग करने से फसल स्वस्थ रहती है, तेल की मात्रा अच्छी होती है और किसान का नुकसान नहीं होता.
जिंक, कॉपर को NPK के साथ इस्तेमाल किया जाए
कृषि वैज्ञानिकों का कहना कि सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए कोई भी तत्व डालना सही तरीका नहीं है. बेहतर है कि तिलहन फसलों में बेसल डोज के रूप में सुपर, पोटाश, बोरोन, सल्फर, जिंक, कॉपर को NPK के साथ इस्तेमाल किया जाए. अगर किसान भाई इस तरीके से सरसों की फसल में माइक्रोन्यूट्रिएंट डालेंगे, तो अच्छा उत्पादन और ज्यादा तेल सुनिश्चित किया जा सकता है.
तेल की मात्रा भी बढ़ जाएगी
हालांकि, अब सरसों की फसल में फूल आ रहे हैं, इसलिए फूल आने के समय किसी भी तत्व का छिड़काव नहीं करना चाहिए. अगर छिड़काव करना ही हो, तो इसे दोपहर 2 बजे के बाद करें, सुबह नहीं. सबसे पहले छिड़काव में माइक्रोन्यूट्रिएंट का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि इसकी कमी से दाने कम और कमजोर बन सकते हैं. जब सरसों की फसल में 70 फीसदी फलिया बन जाए, तब पोटाश और सल्फर का छिड़काव करें. ऐसा करने से दाने चमकदार और बड़े होंगे, साथ ही तेल की मात्रा भी बढ़ जाएगी.