पूजा पाल के धूल रहित गेहूं थ्रेसर मॉडल पर ICAR ने दिखाई रुचि, सांस संबंधी बीमारियों से बचेंगे किसान

बाल वैज्ञानिक पूजा पाल ने कहा कि उनके थ्रेसर मॉडल को सराहना मिली है और उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया गया है. डीएम समेत जिले के अधिकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है. पूजा ने कहा कि यह मॉडल बनाने का मकसद किसानों को धूल से होने वाली परेशानी से बचाना है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 2 Jan, 2026 | 12:15 PM

गेहूं की मड़ाई करते वक्त थ्रेसर से निकलने वाली धूल से छुटकारा दिलाने के लिए धूल रहित थ्रेसर मॉडल बनाने के लिए बाल वैज्ञानिक पूजा पाल को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उनके धूल रहित थ्रेसर के मॉडल पर भारतीय किसान अनुसंधान परिषद थ्रेसर बनाएगा. गेहूं की मड़ाई के वक्त निकलने वाली धूल के चलते किसानों को अस्थमा की बीमारी और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ता है. जबकि, धूल कई किलोमीटर तक उड़कर जाती है इससे आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. बाल वैज्ञानिक पूजा के धूल रहित थ्रेसर से किसानों और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की बात कही गई है.

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पाने वाले 20 बच्चों में पूजा पाल का नाम दर्ज

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली पूजा पाल ने किसानों की बड़ी समस्या को हल करने के लिए यंत्र ईजाद कर डाला है. इसके लिए छात्रा को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से 26 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया है. जनपद वापसी पर जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने पूजा पाल और उनके गाइड शिक्षक राजीव श्रीवास्तव को सम्मानित किया. डीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले देश के 20 बच्चों में पूजा पाल का नाम देखकर गर्व होता है.

कृषि समेत शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बधाई दी

डीएम ने पूजा से उनके पुरस्कार प्राप्त करने के अनुभव, अब तक किए गए प्रोजेक्ट्स और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि पूजा और उनके गाइड शिक्षक का समर्पण, मेहनत और मार्गदर्शन अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है. जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी त्रिपाठी ने कहा कि पूजा की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सही दिशा और निरंतर परिश्रम से बच्चे किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार पाठक ने कहा कि पूजा की सफलता जिले के अन्य छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा है और इससे बच्चों में नवाचार और सृजनशीलता को बढ़ावा मिलेगा. वहीं, कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी पूजा के घरवालों से संपर्क किया है.

गेहूं की मड़ाई में बिना धूल वाला थ्रेसर बनाया

कक्षा आठ की छात्रा पूजा पाल ने किसानों की समस्या को देखते हुए गेहूं की मड़ाई के दौरान थ्रेसर से निकलने वाली धूल कम करने के लिए धूल-रहित थ्रेसर का मॉडल विकसित किया. यह मॉडल उनके विज्ञान शिक्षक राजीव कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में तैयार किया गया और जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया. पूजा ने कहा कि वह अकसर देखती थीं कि गेहूं की मड़ाई के वक्त बहुत धूल निकलती थी, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण फैलता था, जबकि लोगों को सांस लेने संबंधी बीमारियां भी होती हैं. इसके लिए उन्होंने बिना धूल निकालने गेहूं की मड़ाई करने वाले थ्रेसर को तैयार किया है.

puja pal innovate dust sapration thrasher during wheat harvesting

पहली तस्वीर में पिता पुत्तीलाल के साथ और दूसरी तस्वीर में शिक्षक राजीव और थ्रेसर मॉडल के साथ छात्रा पूजा पाल.

आईसीएआर पूजा के मॉडल पर बनाएगा थ्रेसर

पूजा ने कहा कि उनके धूल रहित थ्रेसर मॉडल को सराहना मिली है और अब उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया गया है. पूजा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह थ्रेसर मॉडल बनाने का मकसद किसानों को धूल से होने वाली परेशानियों से बचाना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके मॉडल पर कृषि विभाग और इस क्षेत्र की निजी कंपनियां थ्रेसर बनाएंगी. वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े कुछ लोगों ने पूजा पाल के मॉडल पर थ्रेसर विकसित करने के लिए संपर्क किया है.

जापान में उनके थ्रेसर मॉडल को मिली सराहना

पूजा ने कहा कि बीते जून माह में भारत सरकार ने पूजा को जापान भेजकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया. पूजा पाल का कहना है कि मेहनत, लगन और सही दिशा में सोच के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं. पूजा के पिता पुत्तीलाल ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताई है. उनके शिक्षक राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि किसी शिक्षक के लिए यह गर्व का क्षण है जब छात्रा अपनी प्रतिभा से इस ऊंचाई तक पहुंचती है.

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Published: 2 Jan, 2026 | 12:11 PM

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