सुबह नहीं शाम को करें गेहूं की दूसरी सिंचाई, इतने दिन बाद खेत में डालें यूरिया..होंगे गजब के फायदें

उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश में गेहूं की दूसरी सिंचाई का समय आ गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, हल्की और संतुलित सिंचाई करें, खेत में पानी जमा न हो और शाम के समय सिंचाई करना सबसे सही है. सही तरीके से सिंचाई से पैदावार और फसल की सेहत बनी रहती है.

नोएडा | Updated On: 2 Jan, 2026 | 02:08 PM

Wheat irrigation: उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में गेहूं की बुवाई पूरी हो गई है. अब किसान फसल की सिंचाई करने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, कई किसान अब गेहूं की दूसरी सिंचाई कर रहे हैं. लेकिन दूसरी सिंचाई से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेनी चाहिए. क्योंकि कई किसान दूसरी सिंचाई करते समय अमूमन कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे पैदावार पर असर पड़ता है और ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, दूसरी सिंचाई के समय अगर सही तरीका न अपनाया जाए, तो गेहूं की फसल पीली पड़ने लगती है और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए जिन किसानों ने नवंबर में गेहूं की अगेती किस्मों की बुवाई की थी, उनके लिए अब दूसरी सिंचाई  का उपयुक्त समय है. इस दौरान हल्की और संतुलित सिंचाई करना बहुत जरूरी है, ताकि फसल स्वस्थ रहे, जड़ों को नुकसान न पहुंचे और किसानों को अच्छी उपज मिल सके

गेहूं की जड़ों को नुकसान पहुंचता है

दूसरी सिंचाई गेहूं की फसल के विकास का अहम चरण होती है. इस समय ज्यादा या कम पानी देने से पौधों की बढ़वार रुक सकती है, पत्तियां पीली  पड़ सकती हैं और दाने बनने पर असर पड़ता है. इसलिए सही समय पर, सही मात्रा में पानी देना ही अच्छी पैदावार की कुंजी है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, दूसरी सिंचाई के दौरान खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए. अगर पानी खेत में रुक गया, तो गेहूं की जड़ों को नुकसान पहुंचता है, पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और हल्की हवा में भी फसल गिर सकती है. इससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है.

सिंचाई के समय इन बातों का रखें खयाल

इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि सिंचाई सिर्फ इतनी करें कि मिट्टी गीली  हो जाए, लेकिन खेत में पानी जमा न हो. ज्यादा पानी देने से फसल को फायदा नहीं, बल्कि नुकसान ही होता है. गेहूं की दूसरी सिंचाई के दौरान समय का चुनाव भी बहुत जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, शाम के समय हल्की सिंचाई करना सबसे सही होता है. शाम को हवा कम चलती है, जिससे पानी धीरे-धीरे मिट्टी में समा जाता है. अगले सुबह तक खेत सूखा रहता है और फसल हरी-भरी और स्वस्थ दिखती है.

कब करें गेहूं की दूसरी सिंचाई

कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के लगभग 40 से 45 दिन बाद करनी चाहिए. इस दौरान खेत की मेढ़ और समतल जमीन  पर ध्यान दें, ताकि कहीं भी पानी जमा न हो. जलभराव से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और दाने कमजोर हो जाते हैं. साथ ही दूसरी सिंचाई के लगभग चार दिन बाद खेत में यूरिया डालना फायदेमंद होता है. इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और पत्तियां हरी-भरी रहती हैं. अगर फसल में पत्तियां पीली दिख रही हों, तो मैन्कोजेब दवा का छिड़काव किया जा सकता है. इससे रोगों पर नियंत्रण मिलता है और फसल फिर से स्वस्थ हो जाती है.

Published: 2 Jan, 2026 | 02:05 PM

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