केसर की कीमत हुई डबल, 100 ग्राम का भाव 4000 रुपये.. फिर भी किसानों को नुकसान

कश्मीर में इस सीजन केसर की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, लेकिन उत्पादन में भारी गिरावट से किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा. जलवायु परिवर्तन, लंबे सूखे और कमजोर सिंचाई व्यवस्था ने GI टैग वाले कश्मीरी केसर की पैदावार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 27 Jan, 2026 | 11:18 AM

Saffron Mandi Rate: कश्मीर में इस सीजन केसर की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, लेकिन उत्पादन में भारी गिरावट के कारण किसानों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है. किसानों के मुताबिक इस साल जीआई टैग वाला कश्मीरी केसर 10 ग्राम करीब 4,000 रुपये में बिक रहा है, जो पिछले सीजन के मुकाबले काफी ज्यादा है. हालांकि, पैदावार तेजी से घटने से बढ़ी कीमतों का लाभ बेअसर हो गया है.

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल जम्मू-कश्मीर सैफ्रॉन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद वानी ने कहा कि दाम तो ऊंचे हैं, लेकिन उत्पादन लगभग ढह चुका है. उन्होंने कहा कि केसर का उत्पादन  पिछले साल करीब 75 फीसदी गिर गया और जो कभी करीब 15 टन हुआ करता था, वह अब घटकर सिर्फ करीब एक टन रह गया है. किसानों का कहना है कि बदलते जलवायु पैटर्न, खासकर सर्दियों में लंबे समय तक सूखा पड़ने से फसल का विकास प्रभावित हुआ है, क्योंकि केसर की गांठों को सही विकास के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी की जरूरत होती है.

केसर की गांठें ठीक से विकसित नहीं हो पाईं

कश्मीरी केसर पर जलवायु परिवर्तन का असर लगातार गहराता जा रहा है. ऑल जम्मू-कश्मीर सैफ्रॉन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद वानी ने कहा कि पिछली सर्दियों में लंबे सूखे के कारण मिट्टी में नमी नहीं रही, जिससे केसर की गांठें ठीक से विकसित नहीं हो पाईं. उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में जलवायु बदलाव   ने केसर उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और हाल के सीजन में इसका असर और ज्यादा दिखा है.

केसर उत्पादन में भारी गिरावट

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में केसर उत्पादन 2010-11 में करीब 8 टन था, जो 2023-24 में घटकर 2.6 मीट्रिक टन रह गया, यानी करीब 67.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि 2023-24 में उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले लगभग 4 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन किसान और उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यह स्तर अब भी बहुत कम है. उनका कहना है कि बढ़ती लागत और घटते रकबे की भरपाई नहीं हो पा रही है. उद्योग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सिंचाई ढांचे को मजबूत नहीं किया गया और जलवायु-लचीली खेती को नहीं अपनाया गया, तो कश्मीर का केसर उद्योग  और संकट में आ सकता है.

करोड़ों की लागत से नेशनल सैफ्रॉन मिशन शुरू

सरकार ने केसर उत्पादन को पुनर्जीवित करने के लिए 2010-11 में 400.11 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल सैफ्रॉन मिशन शुरू किया था, जिसका मकसद सिंचाई और खेती के तरीकों में सुधार करना था. अधिकारियों का दावा है कि इस योजना के तहत 2,598 हेक्टेयर जमीन का कायाकल्प किया गया, लेकिन किसान इससे सहमत नहीं हैं. पुलवामा के केसर किसान अली मोहम्मद का कहना है कि जमीनी स्तर पर सिंचाई सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए और यह योजना अपेक्षित नतीजे देने में नाकाम रही है.

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Published: 27 Jan, 2026 | 11:17 AM

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