किसानों की सरकार से अपील- गन्ने की खरीद सीधे किसानों से की जाए, कटाई के लिए तैयार है फसल
तमिलनाडु के सलेम जिले के गन्ना किसान पोंगल गिफ्ट हैम्पर के लिए गन्ने की सीधी सरकारी खरीद की मांग कर रहे हैं. जिले में 1,000 एकड़ में गन्ना तैयार है, लेकिन घोषणा न होने से किसानों को बिचौलियों के नुकसान का डर है.
Tamil Nadu News: तमिलनाडु के सलेम जिले के गन्ना किसान सरकार से अपील कर रहे हैं कि पोंगल गिफ्ट हैम्पर के लिए गन्ना सीधे किसानों से खरीदे जाने की घोषणा जल्द की जाए. ऐसे जिले में पूलामपट्टी, कूडाकल, कुप्पनूर, पिल्लुकुरिची, ओनामपरैयूर, नेडुंकुलम, सिलुवमपलायम, कोनेरिपट्टी सहित कई गांवों में लगभग 1,000 एकड़ में गन्ने की खेती की गई है. इस साल अच्छी बारिश और भूजल की उपलब्धता के कारण अप्रैल- मई में बुवाई हुई थी और अब गन्ना कटाई के लिए तैयार है.
हर साल पोंगल के दौरान सरकार राशन कार्ड धारकों को गिफ्ट हैम्पर के साथ गन्ना देती है, लेकिन इस बार त्योहार में सिर्फ एक महीना बाकी होने के बावजूद अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है. पूलामपट्टी के किसान एन. बाबू जनार्दनन ने कहा कि सिर्फ उनके इलाके में ही करीब 500 एकड़ में गन्ना उगाया गया है. पहले सरकार सीधे किसानों से गन्ना खरीदकर प्रति गन्ना 35 रुपये (कटाई और परिवहन सहित) देती थी, लेकिन अब यह चर्चा है कि इस बार गन्ने की जगह नकद उपहार दिया जाएगा. किसानों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो 75 फीसदी गन्ना बिचौलियों के हाथ चला जाएगा, जो बहुत कम दाम पर खरीद रहे हैं.
1.25 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई
वहीं, वेल्लोर सहकारी शुगर मिल में 2025- 26 पेराई सीजन के दौरान लगभग 5,045 एकड़ में उगाई गई 1.25 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई करेगी. हालांकि, मंगलवार से मिल में गन्ने की पेराई शुरू हो गई है. हथकरघा एवं वस्त्र मंत्री आर. गांधी ने पेराई सत्र की शुरुआत की. ऐसे मिल की रोजाना पेराई क्षमता 2,500 मीट्रिक टन और कुल मौसमी क्षमता 4.30 लाख मीट्रिक टन है. मंत्री ने कहा कि किसान अब गन्ने की जगह धान की खेती ज्यादा कर रहे हैं. इसलिए इस बार लक्ष्य कम रखा गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तय एफआरपी और राज्य सरकार की प्रोत्साहन राशि मिलाकर गन्ने का मूल्य 3,639.50 रुपये प्रति टन तय किया गया है.
1,18,430 क्विंटल चीनी का उत्पादन
2024- 25 के सीजन में वेल्लोर सहकारी शुगर मिल ने 1,27,679 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की, जिससे 1,18,430 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ. इसके अलावा 86.17 लाख यूनिट बिजली तमिलनाडु विद्युत बोर्ड को सप्लाई की गई. इस दौरान 1,948 किसानों से गन्ना खरीदा गया और उन्हें कुल 40.23 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. पहले अविभाजित वेल्लोर जिले में वेल्लोर, तिरुपत्तूर और अंबूर में सहकारी शुगर मिलें थीं, लेकिन जिले के विभाजन के बाद वेल्लोर को छोड़कर बाकी सभी मिलें स्थायी रूप से बंद हो गईं.
मिल को तुरंत खोलने की मांग
नवंबर में रानीपेट के गन्ना किसानों ने फसल खराब होने और नुकसान का हवाला देते हुए मिल को तुरंत खोलने की मांग की थी. उस समय मिल अधिकारियों ने कहा था कि गन्ने की कमी के कारण संचालन रोका गया था और आमतौर पर दिसंबर- जनवरी में पेराई चरम पर होती है, तब मिल शुरू की जाती है.