कपास किसानों को नहीं हो रहा भुगतान, एक हफ्ते बीत जाने के बाद भी खाते में नहीं आए पैसे
CCI के एक अधिकारी ने कहा कि यदि भुगतान गलत खाते में चले जाए या निष्क्रिय खातों की वजह से अटक जाए, तो सुधार प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है. इसलिए हम हर मामले को पूरी तरह जांच रहे हैं.
Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के कपास उत्पादक इलाकों में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने किसानों से खरीदे गए कपास का भुगतान रोक लिया. किसानों का कहना है कि एक हफ्ते में भुगतान का भरोसा दिया गया था, लेकिन कई हफ्ते बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. CCI अधिकारियों के मुताबिक, भुगतान में देरी की वजह बैंक खातों से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें हैं. कई किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था के तहत जनधन या डाकघर से जुड़े खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो या तो निष्क्रिय हैं या बड़े लेन-देन के लिए सक्षम नहीं हैं.
इसके अलावा, कई मामलों में पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिला किसानों के नाम दर्ज हैं, लेकिन उनसे जुड़े बैंक खाते या तो चालू नहीं हैं या उनमें बड़ी रकम जमा होने की सुविधा नहीं है. इन्हीं वजहों से भुगतान प्रक्रिया अटक गई है, ऐसा CCI का कहना है. कई किसानों को 2 लाख रुपये से अधिक का भुगतान होना है, इसलिए CCI सावधानी बरत रहा है ताकि गलत भुगतान न हो. अधिकारियों का कहना है कि गलत जमा या फेल ट्रांसफर होने पर लंबी प्रशासनिक और कानूनी परेशानियां पैदा हो सकती हैं.
सुधार प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, CCI के एक अधिकारी ने कहा कि यदि भुगतान गलत खाते में चले जाए या निष्क्रिय खातों की वजह से अटक जाए, तो सुधार प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है. इसलिए हम हर मामले को पूरी तरह जांच रहे हैं. हालांकि, यह स्पष्टीकरण किसानों की चिंता कम करने में ज्यादा असरदार नहीं साबित हुआ है. किसानों का कहना है कि उन्होंने भरोसे के साथ अपना कपास सौंपा और बैंकिंग या दस्तावेजी कारणों की वजह से उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए. कई किसान तरलता की गंभीर समस्या झेल रहे हैं, उनके कर्ज चुकाने हैं और अगली फसल की तैयारी भी चल रही है. भुगतान में देरी के कारण कई परिवार निजी उधारी पर निर्भर हो गए और जरूरी खर्चे कम करने पड़े.
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महिला किसानों को मान्यता
किसान यूनियनों ने राज्य और केंद्र सरकार से मामले को तुरंत हल करने की मांग की. उन्होंने बताया कि पासबुक और ई-क्रॉप रिकॉर्ड में महिलाओं के नाम पहले की नीति के तहत दर्ज किए गए थे, ताकि महिला किसानों को मान्यता दी जा सके और भुगतान के लिए पर्याप्त व्यवस्था पहले से होनी चाहिए थी. विपक्ष ने भी इस मुद्दे की आलोचना की, कहा कि खरीद एजेंसियों, बैंकों और राजस्व अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी किसानों को नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार देरी होने पर MSP प्रणाली पर भरोसा घट सकता है और किसान मजबूरी में निजी दलालों के पास जा सकते हैं.