कपास के दाम 56 हजार के पार, CCI ने शुरू की 2025-26 की बिक्री

इस सीजन की शुरुआत में अक्टूबर के आसपास कपास के दाम 52 हजार रुपये प्रति कैंडी के करीब थे. धीरे-धीरे इनमें तेजी आई और जनवरी आते-आते कीमतें 56 हजार रुपये प्रति कैंडी से ऊपर निकल गईं. जानकारों का मानना है कि यह इस पूरे सीजन का सबसे ऊंचा स्तर है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Jan, 2026 | 07:44 AM

CCI cotton sale: देश के कपास बाजार में इस समय जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है. नई फसल के बीच कपास के दाम सीजन के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. इसी माहौल में कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने 2025-26 सीजन की खरीदी गई कपास की बिक्री शुरू कर दी है. बाजार जानकारों के मुताबिक यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कपास की कीमतें 56 हजार रुपये प्रति कैंडी के पार निकल चुकी हैं.

पहले ही दिन 1.14 लाख गांठों की बिक्री

CCI ने सीजन की पहली बिक्री में करीब 1.14 लाख गांठ कपास बाजार में उतारी. इनमें से बड़ी मात्रा टेक्सटाइल मिलों और कुछ हिस्से में व्यापारियों ने खरीदी. CCI के अनुसार मिलों को अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की तत्काल जरूरत है, इसी कारण बिक्री की शुरुआत की गई. अब तक 2025-26 सीजन में CCI करीब 82 लाख गांठ कपास की खरीदी कर चुका है.

कीमतों ने छुआ सीजन का सबसे ऊंचा स्तर

इस सीजन की शुरुआत में अक्टूबर के आसपास कपास के दाम 52 हजार रुपये प्रति कैंडी के करीब थे. धीरे-धीरे इनमें तेजी आई और जनवरी आते-आते कीमतें 56 हजार रुपये प्रति कैंडी से ऊपर निकल गईं. जानकारों का मानना है कि यह इस पूरे सीजन का सबसे ऊंचा स्तर है. सरकार द्वारा 31 दिसंबर के बाद कपास आयात पर दी गई शुल्क छूट खत्म होने और कपास बीज की कीमतों में मजबूती ने बाजार को और सहारा दिया है.

सीसीआई की कीमतें बाजार से थोड़ी ऊंची

हालांकि CCI द्वारा तय की गई बिक्री कीमतों को लेकर बाजार में मिलेजुले सुर सुनाई दे रहे हैं. 29 एमएम कपास के लिए CCI ने 56,300 से 57,300 रुपये प्रति कैंडी का दाम रखा है, जो बीते साल के आसपास ही है. लेकिन व्यापारियों का कहना है कि ये दरें खुले बाजार से करीब 1,000 से 1,500 रुपये ज्यादा हैं. ऐसे में मिलें फिलहाल सीमित मात्रा में ही खरीदारी कर रही हैं.

गुणवत्ता तय करेगी आगे की दिशा

कपास कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आगे का रास्ता काफी हद तक CCI की कपास की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा. यदि कपास की गुणवत्ता बेहतर रही तो बिक्री धीरे-धीरे चलती रहेगी. लेकिन अगर गुणवत्ता उम्मीद से कमजोर रही, तो कई मिलें आयातित कपास की ओर रुख कर सकती हैं, जिसकी कीमतें शुल्क समेत 58,000 से 59,000 रुपये प्रति कैंडी तक पड़ रही हैं.

उत्पादन अनुमान बढ़ने से राहत की उम्मीद

इस बीच कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 2025-26 के लिए कपास उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है. महाराष्ट्र और तेलंगाना में बेहतर उत्पादन को देखते हुए फसल अनुमान करीब 2.5 फीसदी बढ़ाकर 317 लाख गांठ कर दिया गया है. इसके बावजूद सीजन के अंत तक करीब 122 लाख गांठ का अधिशेष रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है.

रिकॉर्ड आयात से बाजार पर दबाव

CAI के अनुसार इस सीजन में कपास आयात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है. सितंबर 2026 तक खत्म होने वाले इस कपास वर्ष में आयात 50 लाख गांठ तक पहुंचने की संभावना है. दिसंबर के अंत तक ही 31 लाख गांठ का आयात हो चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा आयात और ऊंची कीमतें आगे चलकर बाजार में संतुलन बना सकती हैं.

किसानों, मिलों और बाजार की नजरें आगे पर

फिलहाल कपास बाजार ऊंचे दाम, सीसीआई की बिक्री और वैश्विक हालात के बीच संतुलन तलाश रहा है. किसानों को जहां बेहतर कीमतों से राहत मिल रही है, वहीं मिलें लागत को लेकर सतर्क नजर आ रही हैं. आने वाले हफ्तों में कपास की गुणवत्ता, आयात की रफ्तार और घरेलू मांग यह तय करेगी कि यह तेजी टिकाऊ साबित होती है या नहीं.

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