Maharashtra News: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) को निर्देश दिया है कि वह विदर्भ में की गई कपास खरीद की पूरी और सटीक जानकारी दे. इसमें गिनिंग और प्रेसिंग फैक्ट्रियों के जरिए हुई खरीद का ब्यौरा भी शामिल होगा. यह आदेश ग्राहक पंचायत महाराष्ट्र के शिरराम सतपुते द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिका में कहा गया है कि खरीद केंद्रों की संख्या और कामकाज इस क्षेत्र में कपास की खेती के अनुसार पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने यह जानना चाहा कि कितनी कपास खरीदी गई और कौन-कौन सी सुविधाओं के जरिए.
CCI ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में विदर्भ में 89 कपास खरीद केंद्र काम कर रहे हैं. इसके अलावा 346 अन्य जगहों पर गिनिंग और प्रेसिंग यूनिट के जरिए भी खरीद हो रही है. कोर्ट ने CCI को निर्देश दिया कि 23 दिसंबर तक इन 346 केंद्रों की पूरी जानकारी सौंपें. मामला इसलिए भी ध्यान खींच रहा है, क्योंकि खेती की गई जमीन और खरीद क्षमता के बीच बड़ा अंतर है. पिछली सुनवाई में, कोर्ट द्वारा नियुक्त अमिकस क्यूरी पुरुषोत्तम पाटिल और याचिकाकर्ता ने नागपुर जिले के गांवों का दौरा कर किसानों से बातचीत करने के बाद हलफनामा दाखिल किया था.
16,86,485 हेक्टेयर में कपास की खेती
हलफनामों में कहा गया कि विदर्भ में 16,86,485 हेक्टेयर में कपास की खेती होती है, जिसके लिए कम से कम 557 खरीद केंद्रों की जरूरत है. इसके बावजूद केवल 89 केंद्र ही काम कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ खरीद केंद्रों की घोषणा करना काफी नहीं है. न्यायालय ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये केंद्र पूरी क्षमता से काम करें. न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि खरीद केंद्रों की प्रभावशीलता कपास की खरीद शुरू होने से पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसानों को इंतजार न करना पड़े या मजबूरी में फसल बेचनी न पड़े.
7 लाख कपास किसानों ने कराया पंजीकरण
वहीं, महाराष्ट्र में करीब 7 लाख किसानों ने कपास बेचने के लिए Kapas Kisan ऐप पर पंजीकरण कराया है. हालांकि, पंजीकरण की प्रक्रिया अभी भी जारी है. ऐसे पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है. यह पंजीकरण CCI को MSP पर बिक्री के लिए किया जा रहा है. अगर आप पंजीकरण नहीं कराते हैं, एमएसपी का लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए कपास किसान 31 दिसंबर से पहले पंजीकरण करा लें. इस बार लंबी किस्म वाली कपास MSP 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है और आयात शुल्क भी 31 दिसंबर तक हटाया गया है.