जू-चिचड़ी से कमजोर हो रहे हैं गाय-भैंस? ये देसी उपाय देंगे तुरंत राहत

जू और चिचड़ी सिर्फ खुजली ही नहीं करातीं, बल्कि पशु को बेचैन भी कर देती हैं. गाय-भैंस बार-बार शरीर रगड़ने लगती हैं, जिससे त्वचा पर घाव हो सकते हैं. लगातार खून चूसे जाने से पशु कमजोर होने लगता है और दूध देने की क्षमता भी घट सकती है. छोटे बछड़ों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 10 Jan, 2026 | 09:52 AM

Lice and ticks: गांव हो या डेयरी फार्म, गाय-भैंस में जू और चिचड़ी की समस्या अक्सर देखने को मिलती है, खासकर बरसात और सर्दियों के मौसम में. नमी बढ़ते ही ये छोटे-छोटे परजीवी तेजी से फैलते हैं और पशुओं के बालों में छिपकर उनका खून चूसने लगते हैं. कई बार पशुपालक इसे हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यही जू और चिचड़ी आगे चलकर पशु की सेहत, दूध उत्पादन और यहां तक कि त्वचा रोगों का कारण बन जाती हैं. अच्छी बात यह है कि इनके लिए हमेशा महंगी दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती. हमारे घर और आसपास ही कुछ ऐसे देसी उपाय मौजूद हैं, जो सही तरीके से अपनाए जाएं तो पशु को जल्दी राहत मिल सकती है.

जू और चिचड़ी लगने से पशुओं को क्या नुकसान होता है

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जू और चिचड़ी सिर्फ खुजली ही नहीं करातीं, बल्कि पशु को बेचैन भी कर देती हैं. गाय-भैंस बार-बार शरीर रगड़ने लगती हैं, जिससे त्वचा पर घाव हो सकते हैं. लगातार खून चूसे जाने से पशु कमजोर होने लगता है और दूध देने की क्षमता भी घट सकती है. छोटे बछड़ों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इसलिए समय रहते इनसे छुटकारा पाना बहुत जरूरी है.

नीम का तेल

नीम को आयुर्वेद में प्राकृतिक कीटनाशक माना गया है. नीम के तेल की तेज गंध और उसके गुण जू और चिचड़ी को दूर भगाने में मदद करते हैं. अगर पशु के शरीर पर जू ज्यादा हैं, तो नीम के तेल को थोड़ा सा गुनगुना करके बालों की जड़ों में हल्के हाथ से लगा दें. खासकर गर्दन, कान के पीछे और पूंछ के पास इसे जरूर लगाएं. दो-तीन बार इस्तेमाल करने पर फर्क साफ नजर आने लगता है.

लहसुन का पानी

लहसुन में मौजूद प्राकृतिक तत्व जू और चिचड़ी को पसंद नहीं आते. इसके लिए कुछ लहसुन की कलियों को पीसकर पानी में मिलाएं और थोड़ी देर छोड़ दें. बाद में इसे छानकर पशु के बालों पर लगाएं या स्प्रे कर दें. इसकी गंध से परजीवी धीरे-धीरे कमजोर होकर बालों से गिरने लगते हैं. ध्यान रखें कि इसे आंख और नाक के पास न लगाएं.

नींबू पानी से जुओं पर असर

नींबू में मौजूद खट्टापन जू और चिचड़ी के लिए नुकसानदायक होता है. एक बाल्टी पानी में एक-दो नींबू का रस मिलाकर पशु को नहलाया जाए तो जुओं की पकड़ कमजोर पड़ जाती है. अगर पूरा नहलाना संभव न हो, तो कपड़े या स्पंज की मदद से प्रभावित जगहों पर नींबू पानी लगाया जा सकता है. यह तरीका हल्की समस्या में खासा कारगर होता है.

सिरका

सिरका भी जू और चिचड़ी को हटाने में मदद करता है. पानी में थोड़ा सा सिरका मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें और पशु के बालों पर छिड़क दें. जहां जू ज्यादा हों, वहां इस घोल का इस्तेमाल करें. कुछ समय बाद जू सुस्त होकर गिरने लगती हैं. हालांकि इसे बहुत ज्यादा मात्रा में न डालें, ताकि त्वचा पर जलन न हो.

साफ-सफाई और धूप का महत्व

देसी उपाय तभी पूरी तरह असर दिखाते हैं, जब साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जाए. पशु को समय-समय पर नहलाना, उसके बालों को सूखा रखना और रोज थोड़ी देर धूप में छोड़ना बेहद जरूरी है. जहां पशु बंधे रहते हैं, उस जगह की सफाई भी उतनी ही अहम है. गीली जगह, गोबर और गंदगी जू-चिचड़ी के पनपने का सबसे बड़ा कारण होती है. अगर संभव हो तो नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उसी पानी से पशु को नहलाएं.

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