तंबाकू किसानों ने जताई चिंता, एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी से कारोबार हो सकता है प्रभावित
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तंबाकू किसानों ने एक्साइज ड्यूटी में अचानक बढ़ोतरी पर चिंता जताई है. इससे किसानों की आय घटने, कानूनी बिक्री कम होने और अवैध तंबाकू व्यापार बढ़ने का खतरा है. एफसीवी तंबाकू किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव और स्थिर टैक्स नीति की आवश्यकता है.
Tobacco Farmer: कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तंबाकू किसानों ने सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) विधेयक 2025 के बाद एक्साइज ड्यूटी में तेज बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई है. किसानों का कहना है कि इससे उनकी आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा और वैध तंबाकू कारोबार कमजोर हो सकता है. पहले से ही यह सेक्टर निर्यात से कम आमदनी, घरेलू कीमतों में ठहराव, बढ़ती लागत और नियामकीय सीमाओं के कारण दबाव में है. किसान संगठनों के मुताबिक, टैक्स बढ़ने से कंपनियां तैयार उत्पादों के दाम बढ़ाएंगी, जिससे कानूनी बिक्री घटेगी. इसका सीधा असर कच्चे तंबाकू की मांग, किसानों की आय और बाजार में फसल की अधिकता के रूप में दिखेगा.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरेशन के अध्यक्ष एचजी परमेश ने कहा कि किसानों ने जीएसटी सुधार इस भरोसे पर स्वीकार किए थे कि तंबाकू पर कुल टैक्स बोझ नहीं बढ़ेगा. किसान नेताओं का कहना है कि एक्साइज ड्यूटी में अचानक और भारी बढ़ोतरी सरकार के पहले दिए गए भरोसे के खिलाफ है और इससे किसानों की आजीविका सीधे खतरे में पड़ गई है. उनके मुताबिक, रिटेल दाम बढ़ने से कानूनी तंबाकू की मांग घटेगी और किसानों के लिए बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी.
किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है
उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के फ्लू-क्योरड वर्जीनिया (एफसीवी) तंबाकू किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है. सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले एफसीवी तंबाकू पर टैक्स बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू की तुलना में कहीं ज्यादा है, जबकि इसकी खेती सबसे ज्यादा नियंत्रित और नियमों के तहत होती है. किसानों का तर्क है कि जरूरत से ज्यादा टैक्स लगाने से खपत कम नहीं होती, बल्कि अवैध कारोबार बढ़ता है. इससे विदेशी कंपनियों को फायदा, देश के किसानों को नुकसान और सरकार को राजस्व घाटा होने का खतरा है.
मजदूरी और परिवहन जैसी लागत लगातार बढ़ रही है
एफसीवी तंबाकू सेक्टर पिछले एक दशक से लगातार दबाव में है. नीलामी में बिक्री घटने और खेती का रकबा कम होने से खेती और उससे जुड़े कामों में रोजगार के बड़े नुकसान हुए हैं, जबकि खाद, मजदूरी और परिवहन जैसी लागत लगातार बढ़ रही है. इस स्थिति को देखते हुए कर्नाटक वर्जीनिया टोबैको ग्रोअर्स एसोसिएशन ने सरकार से एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी वापस लेने और टैक्स दरों को राजस्व-तटस्थ स्तर पर लाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि स्थिर और संतुलित टैक्स नीति से तस्करी पर रोक लगेगी, किसानों की आय सुरक्षित रहेगी, रोजगार बचेगा और आर्थिक नीतियां लंबे समय के सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप होंगी.