पूरा विज्ञान है गेहूं की सिंचाई, समय पर किया ये काम तक ठंड से फसल रहेगी सुरक्षित.. समझें पानी का पूरा खेल

राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और यूपी में शीतलहर से गेहूं फसल प्रभावित हो रही है. सही समय और मात्रा में सिंचाई, संतुलित उर्वरक, खरपतवार नियंत्रण और पाले से बचाव जैसी सावधानियों से किसान फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. जागरूक किसान अच्छी पैदावार और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

नोएडा | Published: 13 Jan, 2026 | 09:13 AM

Wheat Irrigation: राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर पड़ रही है. इससे रबी फसलों पर असर पड़ रहा है. खासकर अधिक ठंड से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ गई है. कई जगहों से शीतलहर से गेहूं फसल को नुकसान पहुंचने की खबर है. लेकिन किसानों को कड़ाके की ठंड को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम ऐसे देसी टिप्स बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाकर किसान गेहूं की फसल को शीतलहर से बचा सकते हैं. इसके लिए उन्हें कोई खर्च करने की भी जरूरत नहीं है. बस नीचे बताए गए तरीकों को अपनाना होगा.

दरअसल, शीतलहर से इंसान के साथ-साथ मवेशियों की भी परेशानी बढ़ जाती है. ऐसे में किसानों को घर से निकलना मुश्किल हो जाता है, जिससे फसल की देखरेख पर असर पड़ता है. खासकर सिंचाई में गलत निर्णय सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकता है. यानी अगर किसान गेहूं की फसल  को शीतलहर से बचाना चाहते हैं, तो समय पर सिंचाई करें.

पानी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है

शीतलहर या पाले के समय सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान  और गिर सकता है, जिससे पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और बढ़वार रुक सकती है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिंचाई तभी करनी चाहिए जब खेत में वास्तविक नमी की कमी हो. अगर मौसम विभाग ने पाले की चेतावनी जारी की है, तो कुछ दिनों के लिए सिंचाई टालना बेहतर होता है, क्योंकि अनावश्यक पानी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

कितने दिन पर करें पहली सिंचाई

गेहूं की पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद, क्राउन रूट इनिशिएशन (CRI) अवस्था में की जाती है और इसे सबसे अहम माना जाता है. शीतलहर के समय हल्की और समान सिंचाई करनी चाहिए, ताकि पानी खेत में जमा न हो और जड़ों तक सही नमी पहुंच सके. इस मौसम में गेहूं के लिए 6-7 सेंटीमीटर पानी पर्याप्त होता है. नहर या ट्यूबवेल से पानी धीरे-धीरे दें, क्योंकि तेज बहाव से मिट्टी सख्त हो जाती है और जड़ों व पौधों की बढ़वार पर असर पड़ता है. सर्दियों में सिंचाई दिन में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच करना सबसे ठीक रहता है, रात या बहुत सुबह करने से खेत में पाले का खतरा बढ़ सकता है.

शीतलहर में करें ये काम

शीतलहर में सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि खरपतवार नियंत्रण और संतुलित उर्वरक  प्रबंधन भी जरूरी है. कमजोर या पोषक तत्वों की कमी वाली फसल ठंड का असर जल्दी झेलती है. इसलिए स्वस्थ और मजबूत फसल ही ठंड का मुकाबला बेहतर ढंग से कर सकती है. मौसम की जानकारी लेकर और सही समय व मात्रा में सिंचाई करने से गेहूं की फसल को शीतलहर से बचाया जा सकता है. अगर किसान जागरूक और सतर्क रहें, तो न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि अच्छी पैदावार की नींव भी मजबूत होती है, जिससे ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.

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