सिंचाई पर निर्भर है गेहूं की 40 फीसदी पैदावार, जानें कब लगाएं खेत में पहला और दूसरा पानी

गेहूं की पहली सिंचाई को सीआरआई (क्राउन रूट इनिशिएशन) अवस्था कहा जाता है. इस समय पौधों में जड़ों का विकास शुरू होता है. अगर इस दौर में नमी की कमी हो जाए तो पौधे कमजोर रह जाते हैं. वहीं, सही समय पर हल्की सिंचाई करने से कल्ले ज्यादा निकलते हैं, जिससे फसल की पैदावार  बढ़ती है.

नागपुर | Updated On: 23 Jan, 2026 | 04:54 PM

Wheat Irrigation: अधिकांश किसानों को लगता है कि खेत में अधिक से अधिक खाद डालने से ही गेहूं की पैदावार अच्छी होती है. इसलिए किसान अधिक पैदावार के लिए गेहूं के खेत में तरह-तरह के रासायनिक खादों का छिड़काव करते हैं. लेकिन ऐसी बात नहीं है. गेहूं की अच्छी पैदावार गेहूं की सही समय पर सिंचाई करने से होती है. वैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है अगर समय पर ही उचित सिंचाई की जाए तो कम लागत में बेहतर उपज होती है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक (शोध) आरके यादव ने कहा कि गेहूं की फसल में पहली और दूसरी सिंचाई  सबसे ज्यादा अहम होती है. उनके अनुसार कुल उत्पादन का करीब 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं दो सिंचाइयों पर निर्भर करता है. गेहूं की पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 21 दिन बाद करनी चाहिए.

कब होती है गेहूं की पहली सिंचाई

उन्होंने कहा कि गेहूं की पहली सिंचाई को सीआरआई (क्राउन रूट इनिशिएशन) अवस्था कहा जाता है. इस समय पौधों में जड़ों का विकास शुरू होता है. अगर इस दौर में नमी की कमी हो जाए तो पौधे कमजोर रह जाते हैं. वहीं, सही समय पर हल्की सिंचाई करने से कल्ले ज्यादा निकलते हैं, जिससे फसल की पैदावार  बढ़ती है. जबकि, गेहूं की दूसरी सिंचाई बुवाई के 40 से 50 दिन बाद करनी चाहिए. इस समय पौधों के तने तेजी से बढ़ते हैं और उन्हें ज्यादा पोषक तत्वों की जरूरत होती है. सही समय पर सिंचाई करने से नाइट्रोजन का अवशोषण बेहतर होता है, जिससे पौधों की लंबाई और मजबूती बढ़ती है.

मेड़ बनाकर सिंचाई करने के फायदे

अगर इस चरण में सिंचाई में लापरवाही बरती जाए तो पौधे पीले पड़ सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, मेड़ बनाकर सिंचाई करना सबसे बेहतर तरीका है, जिससे पूरे खेत में पानी समान रूप से पहुंचता है और पैदावार बढ़ती है. अधिक जलभराव होने से गेहूं की जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे फसल पीली पड़ने लगती है. इसलिए खेत में पानी रुकने से बचाना जरूरी है. विशेषज्ञों के मुताबिक, कम पानी में बेहतर नमी देने के लिए मिनी स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

यूरिया और जिंक सल्फेट का इस्तेमाल

आरके यादव ने किसानों को सलाह दी कि गेहूं की फसल में यूरिया और जिंक सल्फेट  का सही मात्रा और सही समय पर प्रयोग करें. वहीं, चौड़ी और संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए 16 ग्राम मेटसल्फ्यूरॉन और सल्फोसाल्फ्यूरॉन की एक-एक पैकेट को 200 लीटर पानी में घोलकर उचित नमी की अवस्था में छिड़काव करें. इससे किसानों को गेहूं की खेती में बेहतर और अधिक उत्पादन मिल सकता है.

Published: 23 Jan, 2026 | 04:54 PM

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