ड्रिप तकनीक ने बदला सिंचाई का गणित, गन्ना उपज 25 फीसदी तो खाद-पानी में 50 फीसदी बचत

UP Sugarcane Farming: उत्तर प्रदेश में ड्रिप सिंचाई तकनीक गन्ना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. पिछले 9 वर्षों में 73,078 हेक्टेयर क्षेत्र में यह सिस्टम लगाया गया है, जिससे उत्पादन में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. साथ ही पानी और खाद की खपत में 50 फीसदी तक कमी आई है, जिससे लागत घटी और किसानों की आय बढ़ी है.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 29 Apr, 2026 | 11:43 AM

UP News: योगी सरकार के प्रयासों से खेती में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. किसानों की आय बढ़ाने के लिए पिछले 9 साल से लगातार आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने ड्रिप इरीगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) को तेजी से लागू किया है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में 73,078 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में ड्रिप सिस्टम लगाया जा चुका है, और इसे अपनाने वाले किसानों के उत्पादन में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह तकनीक न सिर्फ लागत घटा रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है.

पानी और खाद की बड़ी बचत

ड्रिप सिंचाई की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है. इससे पानी की बर्बादी रुकती है और फसल को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है.

पिछले 9 साल में उत्तर प्रदेश के करीब 73,078 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाया जा चुका है. इसके जरिए:

  • सिंचाई के पानी में लगभग 50 फीसदी तक बचत हो रही है
  • खाद (उर्वरक) की खपत में भी करीब 50 फीसदी कमी आई है

खाद को पानी में मिलाकर सीधे जड़ों तक पहुंचाने की प्रक्रिया से फसल को पूरा पोषण मिलता है और अतिरिक्त खर्च कम होता है.

कम बारिश और खारी मिट्टी में भी फायदेमंद

यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए भी वरदान साबित हो रही है, जहां पानी की कमी या मिट्टी खारी होती है. पहले ऐसे इलाकों में गन्ने की खेती करना मुश्किल था, लेकिन अब ड्रिप सिंचाई की मदद से वहां भी अच्छी पैदावार संभव हो गई है. यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

ड्रिप सिंचाई अपनाने से गन्ने की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है. बेहतर सिंचाई और संतुलित पोषण के कारण फसल मजबूत होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है. इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलती है और उनका मुनाफा बढ़ता है.

इथेनॉल उत्पादन में भी उछाल

गन्ना विभाग के मुताबिक, गन्ना उत्पादन बढ़ने का असर केवल किसानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े उद्योगों को भी फायदा हुआ है. खासकर इथेनॉल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है.

  • साल 2017 तक: 37 चीनी मिलों में इथेनॉल प्लांट, क्षमता 88 करोड़ लीटर
  • वर्तमान में: 53 चीनी मिलों में क्षमता बढ़कर 258 करोड़ लीटर
  • वास्तविक उत्पादन: बढ़कर 137 करोड़ लीटर

इससे न केवल उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि किसानों की मांग भी बढ़ी है.

ड्रिप सिंचाई तकनीक ने गन्ना खेती को एक नई दिशा दी है. पानी और खाद की बचत, उत्पादन में वृद्धि और कम लागत—ये सभी फायदे किसानों के लिए इसे एक बेहतर विकल्प बनाते हैं.

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Published: 29 Apr, 2026 | 11:42 AM
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