पानी है खेती की जीवनरेखा, किसानों को माइक्रो-इरिगेशन अपनाने की जरूरत: राज भूषण चौधरी

मेले में लगाए गए डिजिटल कृषि स्टॉल भी किसानों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रहे. इन स्टॉलों में यह दिखाया गया कि किस तरह मोबाइल फोन के जरिए माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम को नियंत्रित किया जा सकता है और फसलों में पोषक तत्वों की कमी की पहचान कर उसे समय पर दूर किया जा सकता है.

नई दिल्ली | Published: 16 Mar, 2026 | 07:34 AM

Water management agriculture: भारत जैसे कृषि प्रधान देश में पानी की अहमियत किसी से छिपी नहीं है. खेती की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि पानी का उपयोग किस तरह और कितनी कुशलता से किया जाता है. जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव और जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते मौसम के बीच अब खेती को टिकाऊ बनाने के लिए पानी का बेहतर प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है. इसी मुद्दे पर केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों से पानी के कुशल उपयोग पर विशेष ध्यान देने की अपील की.

पानी को बताया खेती की जीवनरेखा

टाईम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, रविवार को समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेले के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि पानी कृषि की “जीवनरेखा” है. यदि जल संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सकता है.

उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे किसानों के बीच “Per Drop More Crop” यानी हर बूंद से अधिक फसल के सिद्धांत को लागू कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं. उनका कहना था कि ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसे माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम को अपनाकर खेतों में पानी की खपत कम की जा सकती है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ी चुनौती

मंत्री ने कहा कि आज खेती के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है. कभी अनियमित बारिश, तो कभी अचानक आने वाली बाढ़ जैसी स्थितियां किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं. ऐसे में पानी का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग ही खेती को सुरक्षित बना सकता है.

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जल प्रबंधन को सही ढंग से अपनाया जाए तो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है. इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा.

किसान मेले में दिखी आधुनिक खेती की झलक

समस्तीपुर के पूसा में आयोजित इस तीन दिवसीय किसान मेले में हजारों किसानों ने भाग लिया. इस मेले का आयोजन राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU) की ओर से किया गया था. मेले में किसानों को आधुनिक खेती से जुड़ी नई तकनीकों और नवाचारों से परिचित कराया गया.

मेले में 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टॉल लगाए गए थे, जहां खेती से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया. इनमें ड्रोन तकनीक, हाइड्रोपोनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खेती जैसी नई पद्धतियां प्रमुख आकर्षण रहीं. इन तकनीकों के माध्यम से किसानों को बताया गया कि आधुनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके खेती को ज्यादा लाभदायक बनाया जा सकता है.

डिजिटल कृषि की बढ़ती भूमिका

मेले में लगाए गए डिजिटल कृषि स्टॉल भी किसानों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रहे. इन स्टॉलों में यह दिखाया गया कि किस तरह मोबाइल फोन के जरिए माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम को नियंत्रित किया जा सकता है और फसलों में पोषक तत्वों की कमी की पहचान कर उसे समय पर दूर किया जा सकता है.

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के जरिए खेती की लागत कम की जा सकती है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. इससे खेती को आधुनिक और वैज्ञानिक दिशा मिल रही है.

किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद

किसान मेले के दौरान कई तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसमें किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था की गई. इन सत्रों में खेती, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा हुई.

इस अवसर पर RPCAU के कुलपति पी. एस. पांडेय ने कहा कि यह मेला क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए नई तकनीकों और नवाचारों को समझने का एक बड़ा मंच साबित हुआ है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर एक समृद्ध और टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करना है.

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