Tractor Tips: खेती में ट्रैक्टर सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि किसान का सबसे भरोसेमंद साथी होता है. खेत की जुताई से लेकर ढुलाई तक, हर काम ट्रैक्टर पर ही टिका होता है. लेकिन अक्सर किसान एक अहम बात को हल्के में ले लेते हैं ट्रैक्टर के टायर. टायर ऐसे होते हैं, जो सीधे जमीन से जुड़ते हैं और पूरे ट्रैक्टर का वजन, ताकत और मेहनत संभालते हैं. अगर टायर चुनने में जरा सी भी लापरवाही हो जाए, तो वही टायर आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं. आज हम उन्हीं आम गलतियों के बारे में बात कर रहे हैं, जो किसान ट्रैक्टर के टायर लेते समय कर बैठते हैं और बाद में पछताते हैं.
सिर्फ सस्ता देखकर टायर खरीद लेना
अक्सर किसान सोचते हैं कि टायर तो बस गोल रबर का होता है, सस्ता मिल जाए तो क्या फर्क पड़ता है. यही सोच सबसे बड़ा नुकसान कर देती है. सस्ते टायर अक्सर कमजोर रबर और घटिया बनावट से बने होते हैं. ऐसे टायर जल्दी घिस जाते हैं और बार-बार बदलने पड़ते हैं. ऊपर से इनका ग्रिप भी सही नहीं होता, जिससे ट्रैक्टर को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है और डीजल की खपत बढ़ जाती है. पहली नजर में जो टायर सस्ता लगता है, वही लंबे समय में सबसे महंगा साबित होता है.
लोड और स्पीड रेटिंग पर ध्यान न देना
हर ट्रैक्टर टायर पर उसकी क्षमता लिखी होती है—वह कितना वजन उठा सकता है और किस रफ्तार पर सुरक्षित है. कई किसान इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. जब टायर पर जरूरत से ज्यादा भार पड़ता है, तो वह जल्दी गर्म हो जाता है और अंदर से कमजोर होने लगता है. धीरे-धीरे उसमें दरारें आने लगती हैं और अचानक फटने का खतरा भी बढ़ जाता है. इससे न सिर्फ नया टायर खरीदना पड़ता है, बल्कि काम के बीच ट्रैक्टर रुकने से नुकसान अलग होता है.
ट्रेड पैटर्न और गहराई की अनदेखी
हर खेत की मिट्टी एक जैसी नहीं होती. कहीं गीली जमीन होती है, कहीं सूखी और कहीं पथरीली. लेकिन कई बार किसान बिना सोचे-समझे ऐसा टायर ले लेते हैं, जिसका ट्रेड पैटर्न उनकी जमीन के लिए सही नहीं होता. गलत ट्रेड पैटर्न से पहिए ज्यादा फिसलते हैं, ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ता है और ईंधन ज्यादा खर्च होता है. इतना ही नहीं, टायर असमान रूप से घिस जाता है और उसकी उम्र कम हो जाती है.
अपनी खेती की जरूरत न समझना
कुछ किसान ट्रैक्टर का इस्तेमाल सिर्फ खेतों में करते हैं, तो कुछ सड़क पर भी ढुलाई के लिए करते हैं. अगर इन जरूरतों को समझे बिना टायर खरीद लिया जाए, तो परेशानी तय है. गलत टायर से मिट्टी ज्यादा दब जाती है, जिससे जमीन की उर्वरता पर असर पड़ता है और फसल की पैदावार भी घट सकती है. साथ ही ट्रैक्टर की पकड़ कमजोर होने से काम में समय और ईंधन दोनों ज्यादा लगते हैं.
टायर प्रेशर को हल्के में लेना
टायर में हवा सही मात्रा में हो, यह उतना ही जरूरी है जितना सही टायर चुनना. कम हवा होने पर टायर जरूरत से ज्यादा मुड़ता है, जिससे वह जल्दी गर्म होता है और किनारों से घिसने लगता है. वहीं, ज्यादा हवा भरने पर ट्रैक्टर उबड़-खाबड़ चलने लगता है और मशीन के दूसरे हिस्सों पर भी असर पड़ता है. दोनों ही हालात में टायर जल्दी खराब होता है और जेब पर सीधा असर पड़ता है.
समझदारी से लिया फैसला ही बचाएगा पैसा
ट्रैक्टर का टायर कोई छोटी खरीद नहीं है. यह खेती की लागत, मेहनत और मुनाफे से जुड़ा होता है. अगर किसान अपनी जरूरत, जमीन की किस्म और ट्रैक्टर के इस्तेमाल को समझकर सही टायर चुनें, तो न सिर्फ टायर ज्यादा चलेगा, बल्कि डीजल बचेगा और काम भी आसान होगा. याद रखें, सही टायर आपकी खेती को मजबूत करता है और गलत टायर आपकी कमाई को धीरे-धीरे खा जाता है.