यूपी में कई किसान नहीं करा पा रहे फार्मर रजिस्ट्री.. इस वजहों से हो रही परेशानी, धर्मेंद्र मलिक ने उठाए सवाल

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के मुताबिक, अगर इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले फसल चक्र में इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 18 Apr, 2026 | 02:50 PM

Farmer ID: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए किसान पहचान पत्र (Farmer ID) को अनिवार्य कर दिया है. अब कृषि और उससे जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह आईडी जरूरी होगी. यहां तक कि अब फसलों की MSP पर खरीद भी Farmer ID पर ही होगी और पीएम किसान योजना का लाभ भी किसान पहचान पत्र ही मिलेगा. इसके लिए राज्य में किसानों की फार्मर आईडी तेजी से बनाई जा रही है. लेकिन भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने फार्मर रजिस्ट्री प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उसने कहा है रियल टाइम खतौनी में नाम और हिस्सेदारी (अंश) से जुड़ी गलतियों के कारण किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं.

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देशभर में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री  तैयार करने का अभियान चला रही हैं. उत्तर प्रदेश में भी यह काम तेजी से किया जा रहा है. लेकिन कई जिलों में बड़ी संख्या में किसान रियल टाइम खतौनी में नाम और हिस्सेदारी (अंश) से जुड़ी गलतियों के कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं. धर्मेंद्र मलिक ने कहा है कि राजस्व अभिलेखों में इन गलतियों की वजह से किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. फार्मर रजिस्ट्री न होने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है. इसके अलावा खतौनी में नाम या हिस्सेदारी की गलती होने से किसान कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी कृषि सुविधाओं का फायदा भी नहीं ले पा रहे हैं.

1 जून से फार्मर रजिस्ट्री पर मिलेगी खाद

उन्होंने कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है कि 1 जून से जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगी, उन्हें रासायनिक खाद  नहीं दी जाएगी. यह निर्णय उन किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री राजस्व रिकॉर्ड में हुई गलतियों की वजह से अभी तक पूरी नहीं हो पाई है. उनके मुताबिक, प्रदेश के किसान पिछले करीब दो साल से अपनी खतौनी में नाम और हिस्सेदारी (अंश) की गलतियों को ठीक कराने के लिए तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग की धीमी कार्यप्रणाली की वजह से इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है. विभाग की इन गलतियों का नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है, जिससे वे कृषि से जुड़े निवेश, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं.

गलतियों तो तुरंत ठीक किया जाए

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के मुताबिक, अगर इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले फसल चक्र में इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था  भी प्रभावित हो सकती है. इसलिए सरकार से अनुरोध है कि इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दिया जाए और प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों तथा राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि हर गांव में विशेष राजस्व चौपाल लगाई जाए. इसके जरिए किसानों की खतौनी में नाम और हिस्सेदारी (अंश) से जुड़ी गलतियों को एक अभियान के रूप में ठीक किया जाए और अधिकतम एक महीने के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि सभी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री समय पर पूरी हो सके और वे सरकारी योजनाओं से वंचित न रहें.

2.33 करोड़ किसानों को आईडी जारी हुई

दरअसल, फार्मर आईडी का उद्देश्य लाभार्थियों की सही पहचान करना और सिस्टम में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है.  ऐसे यूपी में अब तक लगभग 75 फीसदी किसानों को यह किसान आईडी जारी की जा चुकी है और बाकी पात्र किसानों को जल्द कवर करने का काम तेजी से चल रहा है. कृषि विभाग के अनुसार राज्य के 2.88 करोड़ किसानों में से अब तक 2.33 करोड़ किसानों को आईडी जारी की जा चुकी है. बाकी किसानों को आईडी देने के लिए 6 अप्रैल से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

 

 

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Published: 18 Apr, 2026 | 02:49 PM

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