किसानों के हरी खाद पर शिफ्ट होने से केमिकल खाद का स्टॉक बचा, सरकार बोली खरीफ फसलों के लिए कमी नहीं

Chhattisgarh Fertilizers Stock: राज्य सरकार की ओर से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने की बजाय वैकल्पिक उपायों पर अमल करने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया है. इसके चलते किसानों ने हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग बढ़ाया है. इससे न रासायनिक उर्वरकों की मांग में भी हल्की कमी आई है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 7 Jul, 2026 | 04:26 PM

छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि खरीफ सीजन की फसलों के लिए प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. पश्चिम एशिया में तनाव के बाद सप्लाई बाधित होने से खाद किल्लत की आशंकाएं जताई जा रही थीं. राज्य सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि समय रहते खाद के भरपूर स्टॉक की तैयारी कर ली गई है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो. वहीं, किसानों के हरी खाद और जैविक खाद की ओर शिफ्ट होने से मांग में हल्की कमी देखी गई है, जो केमिकल खाद भंडार को बनाए रखने में मददगार साबित हुई है.

पिछले साल से ज्यादा खाद का भंडार

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार प्रदेश में खरीफ सीजन के लिए रासायनिक खाद का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार प्रदेश में खरीफ सीजन के लिए रासायनिक खाद का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. 30 जून 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है. जुलाई में छत्तीसगढ़ को 46500 टन डीएपी की अतिरिक्त आपूर्ति भी मिली है.

5.89 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडार मौजूद

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के अनुसार जारी अपडेट में कहा गया है कि खरीफ फसलों के लिए किसानों को खाद का वितरण तेजी से किया जा रहा है. अब तक किसानों को 7.27 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है, जबकि लगभग 5.89 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडार अभी भी उपलब्ध है. सरकार ने कहा है कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी.

हरी खाद के इस्तेमाल की ओर बढ़े किसान

सरकार की ओर से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने की बजाय वैकल्पिक उपायों पर अमल करने के लिए किसानों को प्रेरित किया गया है. इसके चलते किसानों ने हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग बढ़ाया है. इससे न केवल रासायनिक उर्वरकों की जरूरत भी कम हुई है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान इन विकल्पों को अपनाते हैं, तो लंबे समय में उनकी खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है.

सरकार ने कालाबाजारी पर सख्ती बढ़ाई

उर्वरकों की जमाखोरी या कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है. इसके लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियां सक्रिय कर दी गई हैं. अगर कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो तुरंत सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों का पंजीयन तेजी से पूरा किया जाए. इसके लिए पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल पर डेटा अपडेट किया जा रहा है.

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