Mushroom Farming : धान-गेहूं छोड़िए.. मशरूम की खेती से बदलेगी किस्मत, सरकार भी दे रही सब्सिडी
मशरूम की खेती कम जगह और कम लागत में शुरू होने वाला लाभकारी व्यवसाय है. इसके लिए उपजाऊ जमीन की जरूरत नहीं होती. अंधेरे कमरे में नियंत्रित तापमान पर यह फसल तैयार होती है. कम समय में बार-बार तुड़ाई से अच्छी कमाई संभव है. सरकार प्रशिक्षण और सब्सिडी भी दे रही है.
Mushroom Farming : खेती का नाम आते ही खेत, हल और फसल की तस्वीर सामने आती है, लेकिन अब खेती की परिभाषा बदल रही है. आज किसान बिना उपजाऊ जमीन और बिना धूप के भी शानदार कमाई कर रहे हैं. मशरूम की खेती ऐसा ही एक काम बनकर उभरी है, जो कम जगह, कम लागत और कम समय में बड़ा मुनाफा दे रहा है. बढ़ती महंगाई और धान-गेहूं की लागत से परेशान किसानों के लिए मशरूम अब ‘व्हाइट गोल्ड’ साबित हो रहा है.
क्यों खास है मशरूम की खेती
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मशरूम की खेती पारंपरिक खेती से बिल्कुल अलग है. इसके लिए खेत या उपजाऊ जमीन की जरूरत नहीं होती. किसान अपने घर के खाली अंधेरे कमरे, शेड या छप्पर के नीचे भी इसे उगा सकते हैं. मशरूम को धूप नहीं चाहिए, बल्कि नियंत्रित तापमान और नमी में यह तेजी से बढ़ता है. यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना रहे हैं.
कम समय में तगड़ी कमाई का मौका
मशरूम की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महज 45 से 60 दिनों में फसल तैयार हो जाती है. एक बार स्पॉन डालने के बाद 3 से 4 बार मशरूम की तुड़ाई की जा सकती है. इससे एक ही यूनिट से बार-बार कमाई होती है. सही देखभाल और तकनीक अपनाने पर किसान कुछ ही महीनों में हजारों से लाखों रुपये तक कमा सकते हैं.
छोटे स्तर से भी कर सकते हैं शुरुआत
जो किसान पहली बार मशरूम की खेती करना चाहते हैं, वे छोटे स्तर से भी शुरुआत कर सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ही बैग से प्रयोग के तौर पर काम शुरू किया जा सकता है. थोड़ी सी ट्रेनिंग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह से किसान धीरे-धीरे इसे व्यवसाय के रूप में बढ़ा सकते हैं. खास बात यह है कि मशरूम की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और लोग इसे पनीर के विकल्प के रूप में भी पसंद कर रहे हैं.
सरकार दे रही सब्सिडी और ट्रेनिंग
मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों को यूनिट लगाने पर अनुदान दिया जाता है. सामान्य वर्ग के किसानों को 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जबकि कुछ वर्गों के लिए विशेष योजनाओं के तहत 100 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है. इसके साथ ही किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि वे सही तरीके से खेती कर सकें.
बेरोजगारी और पलायन का बन रहा समाधान
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी और शहरों की ओर पलायन एक बड़ी समस्या है. मशरूम की खेती इस समस्या का मजबूत समाधान बन रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कम निवेश और तेज मुनाफे के कारण युवा और किसान अपने गांव में रहकर ही आत्मनिर्भर बन रहे हैं. यह खेती न केवल आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है.