Onion procurement: देशभर में प्याज की गिरती कीमतों से परेशान किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने 15 मई से प्याज की सरकारी खरीद शुरू कर दी है. सरकार का उद्देश्य किसानों को बाजार में कम दाम मिलने से बचाना और प्याज की कीमतों को संतुलित बनाए रखना है. इस बार सरकार ने कुल 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया है.
पिछले कुछ हफ्तों से कई राज्यों की मंडियों में प्याज के दाम लगातार गिर रहे थे. कई जगह किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा था. वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से खेती और परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है. ऐसे में किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही थी. सरकार की यह खरीद योजना ऐसे समय में आई है जब किसानों को सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत महसूस हो रही थी.
दो सरकारी एजेंसियां करेंगी खरीद
सरकार ने इस बार प्याज खरीद की जिम्मेदारी NAFED और NCCF को सौंपी है. दोनों एजेंसियां 1-1 लाख टन प्याज खरीदेंगी. खरीद के बाद प्याज को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी CWC को दी गई है. इसके लिए देशभर में करीब 20 बड़े गोदामों की पहचान की गई है, जहां 2 लाख टन से ज्यादा प्याज स्टोर किया जा सकेगा.
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस बार सरकार ने खरीद प्रक्रिया में MAPP यानी “मिनिमम एश्योर्ड प्रोक्योरमेंट प्राइस” सिस्टम लागू किया है. इसका मतलब यह है कि किसानों को बाजार से बेहतर और तय दाम देने की कोशिश की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे किसानों को मजबूरी में सस्ते दाम पर प्याज बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. खासकर उन किसानों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से कीमतों में गिरावट के कारण नुकसान झेल रहे थे.
खरीद प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल
सरकार ने इस बार खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया है. किसानों का रजिस्ट्रेशन और भुगतान “ई-समृद्धि” और “ई-समयुक्ति” पोर्टल के जरिए किया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक किसानों को प्याज बेचने के तीन दिन के भीतर सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान कर दिया जाएगा. इससे भुगतान में देरी और बिचौलियों की समस्या कम होने की उम्मीद है.
सिर्फ अच्छी क्वालिटी वाला प्याज खरीदा जाएगा
सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल Grade-A गुणवत्ता वाले प्याज की ही खरीद की जाएगी. किसानों को सलाह दी गई है कि वे मंडी में प्याज लाने से पहले उसकी अच्छी तरह छंटाई कर लें. अधिकारियों का कहना है कि इससे खरीद प्रक्रिया तेज होगी और स्टोरेज में खराब प्याज की समस्या कम होगी.
बाजार और किसानों दोनों को मिलेगा संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार समय पर खरीद नहीं करती, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था. दूसरी तरफ जब बाजार में प्याज की कमी होती है, तो कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं और आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ जाता है. ऐसे में सरकार की यह रणनीति किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए संतुलन बनाने की कोशिश मानी जा रही है. अब किसानों की नजर इस बात पर है कि खरीद कितनी तेजी से होती है और उन्हें बाजार से कितना बेहतर दाम मिल पाता है.